यह ख़बर 27 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

चांदी के लिए स्वर्णिम अवसर, कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

खास बातें

  • सोना ही नहीं, चांदी की कीमत भी इन दिनों आसमान छू रही है। इन दिनों चांदी की कीमत अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है।
नई दिल्ली:

सोना ही नहीं, चांदी की कीमत भी इन दिनों आसमान छू रही है। इन दिनों चांदी की कीमत अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है। इसका कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के साथ-साथ अरब देशों में बढ़ती अस्थिरता भी है। वहां की वित्तीय स्थिति से चिंतित लोग चांदी की अधिक से अधिक खरीदारी कर इसे रख लेना चाहते हैं। राजधानी में सोने-चांदी की बड़ी दुकानों में से एक के मालिक पवन वर्मा के अनुसार, "पिछले 4 साल में चांदी की कीमत में 240 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल यह अब तक की सबसे अधिक कीमत 49,955 रुपए प्रति किलोग्राम पर है। यह किसी भी दिन 50,000 रुपए प्रति किलोग्राम हो सकता है। चांदी की कीमत में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी बढ़ती मांग है। साथ ही खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण भी इसकी कीमत बढ़ रही है।" वर्ष 2008 में चांदी 8,000 रुपए प्रति किलोग्राम था, जो पिछले साल 27,500 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले 52 सप्ताह में इसकी कीमत दोगुनी हो गई है। चांदी की कीमत में वृद्धि का अनुपात सोने से भी अधिक है। पिछले 5 साल में इसमें 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई है। इन दिनों सोने की कीमत अब तक सबसे अधिक 21,065 रुपए प्रति 10 ग्राम है। विशेषज्ञों के अनुसार चांदी के दाम में वृद्धि कोई नई चीज नहीं है। दुनियाभर में चांदी की आरक्षित निधि और वित्तीय अस्थिरता को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं हैं, जिसकी वजह से कीमत लगातार बढ़ रही है। वित्त, कर संबंधी मामलों में सुझाव देने वाली एक बहुराष्ट्रीय कंपनी डेलोइट की निदेशक कल्पना जैन के अनुसार, "चांदी की कीमत में उछाल के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग और इसके बचे रहने तथा वित्तीय अस्थिरता को लेकर विभिन्न तरह की आशंकाएं इसकी कीमत बढ़ा रही हैं।" चांदी की बढ़ती कीमत को देखते हुए भारत में इसे लेकर सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) भी शुरू हो गया है। बढ़ती मांग को देखते हुए इसके आयात में वृद्धि की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल सबकी निगाहें सोमवार को संसद में वित्त वर्ष 2011-12 के लिए पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं। समझा जा रहा है कि यदि आयात कर में वृद्धि की जाती है तो मांग में कमी आ सकती है।


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