खास बातें
- सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई तक देश के 89 बड़े पॉवर प्लांटों में 33 के पास 7 दिन से कम का कोयला स्टॉक बचा था।
नई दिल्ली: देश में ज़रूरत के मुताबिक बिजली पैदा करने में आ रही दिक्कत के पीछे बड़ी वजह कोयले का बढ़ता संकट है। सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई तक देश के 89 बड़े पॉवर प्लांटों में 33 के पास 7 दिन से कम का कोयला स्टॉक बचा था जबकि 18 पॉवर प्लांट्स के पास 4 दिन से भी कम का कोयला था यानी देश के 51 बड़े पॉवर प्लांट्स के पास 7 दिन से भी कम का कोयला बचा था।
नए बिजली मंत्री वीरप्पा मोइली ने एनडीटीवी से कहा कि वो इस मामले से गंभीरता से निपटेंगे। उनके मुताबिक यह एक संवेदनशील मामला है। इस संकट से हम कैसे निपटते हैं ये आगे के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कोयला कम है तो प्लांट क्षमता के हिसाब से बिजली नहीं पैदा कर पा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि उद्योगजगत के साथ−साथ आम लोगों तक ज़रूरत के मुताबिक बिजली नहीं पहुंच रही है। रही सही कसर कमज़ोर मॉनसून ने पूरी कर दी है। बड़े बांधों में इस बार औसत से कम पानी है जिसका असर हाइड्रो-पॉवर प्रोडक्शन पर पड़ने शुरू हो चुका है।