साल के पहले दिन शेयर बाजारों की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 244 अंक टूटा

बिकवाली दबाव से सेंसेक्स में यह एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट है. इससे पहले 1 दिसंबर को यह 316.41 अंक टूटा था.

साल के पहले दिन शेयर बाजारों की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 244 अंक टूटा

फाइल फोटो

मुंबई:

ऑटो, बैंकिंग और आईटी खंड के शेयरों में गिरावट के चलते बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स सोमवार को साल के पहले दिन 244 अंक लुढ़ककर 34,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ. बिकवाली दबाव से सेंसेक्स में यह एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट है. इससे पहले 1 दिसंबर को यह 316.41 अंक टूटा था. कारोबारियों का कहना है कि निवेशकों ने शेयर बाजारों में तेजी के बीच बिकवाली पर जोर दिया. राजकोषीय लक्ष्यों में चूक की आशंका, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार से किसी संकेत के अभाव से बाजार में धारणा प्रभावित हुई. वैश्विक बाजारों नए साल के अवकाश के चलते बंद रहे. बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स कारोबार के दौरान 33,766.15 अंक तक लुढ़का. यह अंतत: 244.08 अंक की गिरावट दिखाता हुआ 33,812.75 अंक पर बंद हुआ.

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शुक्रवार को सेंसेक्स 208.80 अंक चढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 34,056.83 अंक पर बंद हुआ था. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 95.15 अंक टूटकर 10,435.55 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान निफ्टी 10,423.10 अंक तक लुढ़का. 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स सुबह कमजोरी के रुख के साथ खुला. कारोबार के दौरान सीमित दायरे में रहने के उपरांत अंतिम घंटे में बिकवाली दबाव से इसमें गिरावट आई. वहीं बिजली, पूंजीगत सामान, रीयल्टी, हेल्थकेयर और टिकाऊ उपभोक्ता सामान खंड में लिवाली समर्थन ने हालांकि सेंसेक्स में गिरावट को थामा.

बिकवाली दबाव से टीसीएस का शेयर सबसे अधिक 1.79 प्रतिशत टूटा. इंडसइंड बैंक का शेयर 1.45 प्रतिशत जबकि हिंदुस्तान यूनीलीवर का शेयर 1.40 प्रतिशत टूटा. इसके साथ ही एचडीएफसी लिमिटेड, टाटा स्टील, ओएनजीसी, अडाणी पोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, रिलांयस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, कोटक बैंक और यस बैंक के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए. ऑटो खंड में टाटा मोटर्स, बजाज ऑटो, एमएंडएम, मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प का शेयर बिकवाली दबाव में आकर गिरावट के साथ बंद हुआ.

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जियोजित फिनांशल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा बाजार ने नए साल की शुरुआत सतर्क रुख के साथ की. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों की धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा. अमेरिका में कच्चे तेल के दाम जून 2015 के बाद पहली बार 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं. (इनपुट भाषा से)


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