नई दिल्ली: बैंकों के लिए लंबे समय से फायदेमंद माने जाते रहे खुदरा ऋण पूरी प्रणाली के लिए ही जोखिम से भरपूर हो सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक रिपोर्ट में यह कहा. हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि पूरी प्रणाली के लिए यदि कोई जोखिम उत्पन्न होता भी है तो वह अपनी नीतियों के जरिए उससे निपटने में पूरी तरह सक्षम है.
आरबीआई ने 2021-22 के लिए 'भारत में बैंकिंग रुझान और प्रगति' के बारे में कहा, ‘‘अनुभव के आधार पर मिले साक्ष्य बताते हैं कि बड़ी संख्या में खुदरा ऋण व्यक्ति विशेष या समूह विशेष को दिए जाते हैं तो इससे पूरी व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा होता है.''
रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के वर्षों में भारतीय बैंक एक-एक करके औद्योगिकी क्षेत्र से खुदरा ऋण का रुख कर रहे हैं और यह रुझान बैंकों के सभी समूहों में नजर आ रहा है चाहे वे बैंक राज्य के स्वामित्व वाले हों, निजी हों या फिर विदेशी।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पूरी प्रणाली के लिए जोखिम बढ़ता है.