खास बातें
- सचिवों की कमेटी ने कहा है कि रिटेल कारोबार में 51 फीसदी निवेश को इजाजत दे दी जाए। ये फैसला अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
New Delhi: बड़े शहरों में रिटेल कारोबार करने के लिए बड़े विदेशी पैसे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला एक कमेटी ने लिया है। सचिवों की कमेटी ने कहा है कि रिटेल कारोबार में 51 फीसदी निवेश को इजाजत दे दी जाए। ये फैसला अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। शर्त ये रखी गई है कि ये बड़ी दुकानों सिर्फ उन शहरों में खोली जाएं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा है। ये भी शर्त रखी गई है कि कम से कम 450 करोड़ रुपये का निवेश किया जाए। सचिवों की समिति ने बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई: की आज सिफारिश की। साथ ही यह शर्त भी जोड़ाने की सिफारिश की है कि साझा कंपनी में विदेशी निवेशक को कम से कम 10 करोड़ डालर का निवेश करने की शर्त लागू की जाए। एक सूत्र ने कहा कि सचिवों की समिति की शुक्रवार को कैबिनेट सचिव अजित कुमार सेठ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी निर्णय किया गया कि खुदरा शृंखला चलाने वाली विदेशी कंपनियों को अपने पूंजी निवेश का कम से कम आधा हिस्सा आपूर्ति शृंखला की पीछे की कड़ियों में लगाना होगा। पीछे की कड़ियों से मतलब कोल्ड चेन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से लगाया जाता है। सूत्र ने कहा कि राजनीतिक तौर पर संवेदनशील इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के पास ले जाया जाएगा। वालमार्ट जैसी कई वैश्विक खुदरा कंपनियां भारत के बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में पूर्ण रूप से पैर पसारने की प्रतीक्षा करती रही हैं। भारत का खुदरा क्षेत्र करीब 590 अरब डॉलर का होने का अनुमान है, जिसमें छोटे किराना दुकानदारों का वर्चस्व है। खुदरा बाजार में कंपनियों का हिस्सा अभी 15 प्रतिशत के आसपास है। उल्लेखनीय है कि भारत पहले ही एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दे चुका है, जबकि थोक कारोबार में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। अधिकारी ने कहा कि इस मुद्दे पर सचिवों की समिति की संभवत: यह आखिरी बैठक है।(इनपुट भाषा से भी)