RBI मौजूदा रेपो रेट को रख सकता है बरकरार, 2024 की शुरुआत में कटौती संभव: विश्लेषक

केंद्रीय बैंक ने इस महीने की शुरुआत में MPC बैठक के दौरान रेपो रेट (Repo Rate) को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था. 

RBI मौजूदा रेपो रेट को रख सकता है बरकरार, 2024 की शुरुआत में कटौती संभव: विश्लेषक

RBI ने मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में Repo Rate में 2.50% की वृद्धि की थी.

नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वर्ष नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का रुख कायम रख सकता है और वर्ष 2024 की शुरुआत में दरों में कटौती भी की जा सकती है. विश्लेषकों  ने यह उम्मीद जताई है. इस महीने की शुरुआत में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला कर तमाम विश्लेषकों को चौंका दिया था. इस नीतिगत समीक्षा बैठक के हाल में जारी ब्योरे को देखते हुए विशेषज्ञों को लगता है कि मुद्रास्फीति में नरमी आने के साथ दरों में कटौती भी शुरू हो जाएगी.

पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में रेपो रेट में बढ़ोतरी

केंद्रीय बैंक ने इस महीने की शुरुआत में MPC बैठक के दौरान रेपो रेट (Repo Rate) को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था. इससे पहले, आरबीआई ने मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी.

मार्च 2024 में खत्म होने वाली तिमाही में Repo Rate में 0.25% की कटौती संभव

विदेशी ब्रोकरेज कंपनी एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आरबीआई 2023 में भी दरों में कोई परिवर्तन नहीं करेगा और मार्च 2024 में खत्म होने वाली तिमाही में दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है.'' इस बयान में कहा गया कि चार प्रतिशत मुद्रास्फीति का लक्ष्य तो निकट भविष्य के लिए रखा ही नहीं गया है और आरबीआई इसे कमजोर वृद्धि की कीमत पर प्राप्त भी नहीं करना चाहेगा.

अक्टूबर से नीतिगत दरों में हो सकती है कटौती: नोमुरा

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घरेलू ब्रोकरेज कंपनी कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि एमपीसी की अप्रैल बैठक के ब्योरे से मुद्रास्फीति परिदृश्य को लेकर सदस्यों की चिंता झलकती है. इसके अलावा 2023-24 में दरों में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं किए जाने का अनुमान है, क्योंकि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर ही बनी रहने वाली है. वहीं, जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने अनुमान जताया है कि अक्टूबर से दरों में कटौती हो सकती है.