नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज व्यवस्था दी कि किसी आवासीय परियोजना में निर्माणाधीन फ्लैट के लिए क्रेता व बिल्डर के बीच होने वाले समझौते पर कोई सेवा कर नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, न्यायाधीश एस मुरलीधर तथा न्यायाधीश विभु बाखरू की पीठ ने यह भी व्यवस्था दी कि बिल्डर द्वारा फ्लैट की पसंदीदा जगह के लिए ली जाने वाली राशि पर सेवाकर लगाया जा सकता है। अदालत के अनुसार यह ग्राहकों की पसंद पर आधारित है और मूल्य वर्धन जैसा है।
यह आदेश मैसर्स सेठी बिल्डवैल प्राइवेट लिमिटेड के साथ अलग अलग समझौते करने वाले कुछ व्यक्तियों की याचिका पर दिया गया है। इन लोगों ने उक्त बिल्डर द्वारा नोएडा के सैक्टर 76 में बनायी जा रही बहुमंजिला आवासीय परियोजना में फ्लैट खरीदने के लिए समझौते किए हुए हैं।
वित्त कानून 1994 के तहत परिभाषित परिसर के निर्माण के संबंध में सेवा कर लगाने के खिलाफ अदालत में उक्त याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं में तरजीही जगह शुल्क पर सेवा कर लगाने को भी चुनौती दी गई है। पीठ ने कहा कि सरकार को इस मामले में देखना चाहिए कि क्या बिल्डर ने याचिकाकर्ताओं से कोई सेवाकर लिया है और इस तरह की राशि उसके यहां जमा कराई गई है तो उसे छह प्रतिशत ब्याज के साथ रिफंड करना चाहिए।