खास बातें
- बैंकों पर नकदी की तंगी का दबाव कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय रिजर्व बैंक ने संकेत दिया कि वह आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) कुछ और कम कर सकता है।
नई दिल्ली: बैंकों पर नकदी की तंगी का दबाव कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय रिजर्व बैंक ने संकेत दिया कि वह आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) कुछ और कम कर सकता है।
सीआरआर वह व्यवस्था है जिसके तहत बैंकों को अपने पास जमा राशियों का एक तय हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है और उसपर उन्हें ब्याज नहीं मिलता।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा, ‘हम नकदी की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं... मुझे लगता है कि मध्य तिमाही समीक्षा के दौरान सीआरआर में और कटौती का फैसला किया जाएगा। एक बार कटौती के बार मुझे लगता है कि अगली कटौती की संभावना हमेशा सामने होती है।’
प्रणाली में तरलता की समस्या कम करने के लिए आरबीआई ने इस महीने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा सीआरआर में कटौती कर इसे छह फीसद से 5.5 फीसद कर दिया। इस तरह बैंकों को ऋण देने के लिए और 32,000 करोड़ रुपये की नकदी मिल गई है।
रिजर्व बैंक 15 मार्च को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा करने वाला है।