यह ख़बर 29 जनवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

आरबीआई ने की दरों में कटौती, ऋण सस्ते होने के आसार

खास बातें

  • आरबीआई ने वित्त वर्ष 2012-13 की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती कर दी।
नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2012-13 की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती कर दी। इससे जहां एक ओर बाजार में तरलता बढ़ेगी, वहीं ग्राहकों के लिए घर और वाहन खरीदना आसान हो सकता है, क्योंकि हर तरह के ऋणों पर ब्याज दरें घट सकती हैं।

आरबीआई ने रेपो दर और नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में 25 आधार अंकों की कटौती की है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में 18 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता का संचार होगा।

लम्बे इंतजार के बाद हुई इस कटौती के बाद ताजा रेपो दर 7.75 फीसदी हो गई। इससे पहले आरबीआई ने अप्रैल 2012 में रेपो और रिवर्स रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की थी।

रेपो दर वह दर होती है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को छोटी अवधि के कर्ज देता है। रेपो दर में कटौती के साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी घट कर 6.75 फीसदी हो गई। रिवर्स रेपो दर वह दर होती है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों से छोटी अवधि के लिए उधारी लेता है।

इस कदम से वाणिज्यिक बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और यदि इस लाभ को ग्राहकों तक भी पहुंचाया गया, तो आवास, वाहन तथा अन्य ऋणों पर लगने वाली ब्याज दरें सस्ती हो सकती हैं। हालांकि बैंक इस मुद्दे पर बुधवार को कोई निर्णय लेंगे।

आरबीआई ने सीआरआर को भी 25 आधार अंक घटाकर 4.00 फीसदी कर दिया है। यह बैंकों की कुल जमा का वह अनुपात होता है, जो उन्हें आरबीआई के पास रखना होता है। सीआरआर में इस कटौती से बाजार में 18 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता पैदा होगी।

मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा में आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, "नकद आरक्षी अनुपात में इस कटौती से बैंकिंग प्रणाली में 18 हजार करोड़ रुपये की प्राथमिक तरलता का संचार होगा।"

आरबीआई ने बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही मुख्य दरों में कटौती की है। थोक कीमतों पर आधारित देश की महंगाई दर दिसम्बर में तीन सालों के निचले स्तर पर 7.18 फीसदी दर्ज की गई। आरबीआई पहले ही जता दिया था कि जनवरी-मार्च तिमाही में दरों में कटौती हो सकती है, क्योंकि महंगाई घटने के आसार हैं।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने मंगलवार को आरबीआई के कदम को संतुलित बताया और कहा कि दर कटौती से तरलता बढ़ेगी और आर्थिक विकास में तेजी आएगी।

आरबीआई के इस कदम का उद्योग जगत ने तह-ए-दिल से स्वागत किया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने एक बयान में कहा, "सरकार ने विकास की प्रक्रिया को वापस पटरी पर लाने के लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उद्योग जगत को खुशी है कि आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि वह आगे विकास को पटरी पर लाने के लिए सरकार के साथ तालमेल बिठाएगा।"

उद्योग जगत के एक संगठन फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "हाल ही में फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण में प्रतिभागियों ने आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए अविलम्ब रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती और कारोबारी साल 2014 तक इसमें 75 से 100 आधार अंकों की कटौती की वकालत की थी।"

एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार एन. धूत ने कहा, "सीआरआर और रेपो दर दोनों ही में कटौती सही दिशा में उठाया गया कदम है। लेकिन बाजार को इसे सच्ची भावना के साथ लेना चाहिए और इसका लाभ आम लोगों को भी देना चाहिए।"

सुब्बाराव ने कहा कि समीक्षा में तीन मुख्य मुद्दों पर ध्यान दिया गया-महंगाई में नरमी आने के साथ विकास को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त ब्याज दर व्यवस्था बनाना, महंगाई को रोकना और उत्पादक गतिविधियों को कर्ज देने के लिए प्रणाली में समुचित तरलता सुनिश्चित करना।

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ अनुमानों में संशोधन भी किए। सुब्बाराव ने कहा कि मौजूदा कारोबारी साल के लिए विकास दर का अनुमान 5.5 फीसदी रखा गया है, जो पहले 5.8 फीसदी रखा गया था। उन्होंने कहा कि मार्च के अंत तक महंगाई दर का अनुमान 6.8 फीसदी रखा गया है, जो पहले 7.5 फीसदी रखा गया था।

आरबीआई द्वारा रेपो दर और सीआरआर में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा से शेयर बाजारों में तत्काल उछाल तो आया, लेकिन यह उछाल ज्यादा समय तक टिका न रह सका।

सेंसेक्स दोपहर लगभग 12.23 बजे 74.82 अंकों की तेजी के साथ 20,178.17 पर और निफ्टी भी लगभग इसी वक्त 29.85 अंकों की तेजी के साथ 6,104.65 पर कारोबार करते देखे गए थे।

लेकिन मुनाफा वसूली और मौजूदा कारोबारी वर्ष के लिए देश के विकास का पूर्वानुमान घटाए जाने के कारण, शेयर बाजारों की यह तेजी ज्यादा समय तक  नही टिक पाई और उसमें गिरावट का रुख शुरू हो गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 112.45 अंकों की गिरावट के साथ 19,990.90 पर और निफ्टी 24.90 अंकों की गिरावट के साथ 6,049.90 पर बंद हुआ।

ज्ञात हो कि आरबीआई ने मौजूदा कारोबारी साल की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में देश के विकास का पूर्वानुमान घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया, जिसे पहले उसने 5.8 फीसदी पर रखा था।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट देखी गई। मिडकैप 39.91 अंकों की गिरावट के साथ 6,935.93 पर और स्मॉलकैप 65.11 अंकों की गिरावट के साथ 7,096.94 पर बंद हुआ।

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बीएसई के 13 में से सिर्फ एक सेक्टर तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (0.70 फीसदी) में तेजी रही।