जून में बेंचमार्क रेट में बढ़ोतरी कर सकता है आरबीआई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर बेंचमार्क रेट में बढ़ोतरी करने का दबाव बनता जा रहा है और अब ऐसे अनुमान आ रहे हैं कि बैंक अपेक्षा से पहले ही रेट बढ़ा सकता है. न्यूज एजेंसी Reuters के पोल के नतीजों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक जून में ही रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है. बता दें कि पिछले दो सालों में आरबीआई ने उदार नीति बरकरार रखी है और मौद्रिक नीति समिति की पिछली 11 बैठकों से पॉलिसी रेट यथावत रखे गए हैं. RBI इस महीने की शुरुआत में हुई बैठक में नीतिगत दर रेपो को 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया था.
रेपो दर पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिये कर्ज देता है. जबकि रिवर्स रेपो दर के तहत बैंकों को अपना पैसा रिजर्व बैंक के पास रखने पर ब्याज मिलता है.
मार्च में रिटेल इंफ्लेशन रेट 7% पर चढ़ गया है, जोकि बैंक की लक्षित सीमा 6% से ऊपर है. वहीं, इसके पिछले 17 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है. इसके और ऊपर बढ़ने की भी आशंका है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते उपभोक्ता बाजार प्रभावित हो रहा है. ऐसे में आरबीआई के पास अपेक्षित समय से पहले रेट बढ़ाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.
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20-25 अप्रैल के Reuters के पोल में 46 अर्थशास्त्रियों में से महज तीन को छोड़कर सभी ने इस पक्ष में वोट दिया है कि आरबीआई जून में रेट में बढ़ोतरी कर सकती है. अगर आरबीआई ऐसा करती है तो रेट में ये हाइक जून, 2018 के बाद पहली हाइक होगी. इस पोल में 42 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर इसे 4.25% किया जा सकता है, वहीं, एक अर्थशास्त्री ने 50 बेसिस पॉइंट का अनुमान जताया है.
बता दें कि इसके कुछ हफ्तों पहले हुए पोल में अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया था कि आरबीआई रेट हाइक का फैसला अगस्त में लेगी. 50 में से 12 का ही अनुमान था कि हाइक जून में आ सकता है.
बता दें की एमपीसी की पिछली बैठक में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया था. फरवरी की मौद्रिक समीक्षा बैठक में एमपीसी ने आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति के 5.7 प्रतिशत के स्तर पर रहने की संभावना जताई थी, जोकि पहले इसके 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान था.