यह ख़बर 25 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

ब्याज दरों में एक और वृद्धि से उद्योग जगत चिंतित

खास बातें

  • उद्योग जगत ने रिजर्व बैंक द्वारा अल्पकालिक ब्याज दरों में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत वृद्धि पर चिंता जताई है।
नई दिल्ली:

देश के उद्योग जगत ने रिजर्व बैंक द्वारा अल्पकालिक ब्याज दरों में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत वृद्धि पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे निजी क्षेत्र में निवेश प्रभावित होगा और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ेगी। उद्योग जगत ने हालांकि, बचत खाते पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त करने के रिजर्व बैंक के फैसले का स्वागत किया है। उद्योगों ने इस बात पर भी संतोष जताया है कि महंगाई के मामले में रिजर्व बैंक ने अंतत: आपूर्ति उपायों को भी महत्व दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ाते हुए आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने पर गौर किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की के महासचिव डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि रुपये में तेजी से हो रहे अवमूल्यन से उसे रोकने के बारे में रिजर्व बैंक की तरफ से स्पष्ट वक्तव्य विशेष स्वागत योग्य होता। उन्होंने कहा कि मार्च तक मुद्रास्फीति के सात प्रतिशत रहने का अनुमान उसका उम्मीद से कम आकलन लगता है। रिजर्व बैंक का यह अनुमान पूरी तरह पिछले वर्ष के ऊंचे तुलनात्मक आधार पर निर्भर लगता है, इससे मुद्रास्फीतिक अवधारणा कमजोर पड़ेगी। एसोचैम अध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा, कमजोर पड़ते रुपये, सुस्ती के संकेत देती अर्थव्यवस्था और बढ़ती मुद्रस्फीति यह सचमुच चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि लगातार महंगे होते कर्ज के कारण कई उद्योगों ने अपनी निवेश परियोजनाओं को स्थगित कर दिया। इससे औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती आ गई और इसका परिणाम रोजगार के अवसरों के नुकसान के तौर पर सामने आ सकता है।


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