खास बातें
- औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में आई गिरावट पर चिंता जताते हुए रिजर्व बैंक से नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला रोकने का आग्रह किया है।
New Delhi: देश के उद्योग जगत ने औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में आई गिरावट पर चिंता जताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक से नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला रोकने का आग्रह किया है। जुलाई 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की वृद्धि दर घटकर 3.3 प्रतिशत रह गई जो कि पिछले 21 महीने में सबसे कम है। भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, जुलाई के आईआईपी आंकड़े निराशाजनक हैं और हमारी इस आशंका का समर्थन करते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र का कमजोर प्रदर्शन जारी रहेगा। सीआईआई भारतीय रिजर्व बैंक से आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाने की अपनी नीति से हटने का आग्रह करता है। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में एक साल पहले की तुलना में मात्र 3.3 प्रतिशत वृद्धि के निराशाजनक प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह एक महीना पहले जून में यह 8.8 प्रतिशत और एक साल पहले 9.9 प्रतिशत रही थी। सीआईआई ने सरकार से प्रमुख परियोजनाओं का कार्यान्वयन तेज करने को कहा है। वहीं फिक्की ने रसायन, वस्त्र तथा परिधान जैसे क्षेत्रों की नकारात्मक वृद्धि दर जारी रहने को चिंता का कारण बताते हुए कहा है कि सरकार को ब्याज के बढ़ते बोझ को कम करके उद्योग को राहत देनी चाहिए। फिक्की महासचिव राजीव कुमार ने कहा, हालात वास्तव में गंभीर हैं क्योंकि विनिर्माण तथा खनन दोनों क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में अच्छी खासी गिरावट आई है। उन्होंने कहा, अगर सुधारात्मक नीतिगत कदम नहीं उठाए गए तो हम शीघ्र ही नकारात्मक वृद्धि वाले दौर में होंगे। एसोचैम महासचिव डीएस रावत ने कहा है, इस समय बयाज दरों में किसी भी तरह की वृद्धि का सीधा असर क्षमता विस्तार तथा रोजगार सृजन पर होगा। उच्च मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए मौद्रिक नीति को और कड़ा करने के कदमों का अब दीर्घकालिक असर हो सकता है। पीएचडी चैंबर ने भारतीय रिजर्व बैंक से अपनी कड़ी मौद्रिक नीति पर रोक लगाने को कहा है। चैंबर का कहना है कि दरों में और वृद्धि का असर उद्योग तथा सकल अर्थव्यवस्था पर होगा।