खास बातें
- रिजर्व बैंक का कहना है कि अभी चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही, यानी अगस्त-सितंबर 2011 तक अर्थव्यवस्था पर ऊंची मुद्रास्फीति का दबाव बना रह सकता है।
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक महंगाई दर को लेकर चिंतित है और उसका कहना है कि अभी चालू वित्त वर्ष में की पहली छमाही, यानी अगस्त सितंबर 2011 तक अर्थव्यवस्था पर ऊंची मुद्रास्फीति का दबाव बना रह सकता है। इन अनुमानों के बीच केन्द्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में एक बार फिर वृद्धि के संकेत दे दिए हैं ताकि मुद्रास्फीति पर शिकंजा कसा जा सके। वर्ष 2011-12 की सालाना ऋण एवं मौद्रिक नीति घोषित करने की पूर्व संध्या पर रिजर्व बैंक की जारी वृहत आर्थिक और मौद्रिक घटनाक्रम रिपोर्ट में कहा गया है अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं, खासतौर से कच्चे तेल के ऊंचे दाम के मद्देनजर इस साल अभी महंगाई के दबाव से निजात मिलने वाली नहीं है। बैंक का कहना है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में मुद्रास्फीति के ऊंचा बने रहने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष के उत्तरार्द्ध में मुद्रास्फीति कुछ नीचे आएगी लेकिन फिर भी सामान्य स्तर से ऊपर ही रहेगी। उल्लेखनीय है कि मार्च के अंत में मुद्रास्फीति 8.98 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं के दाम ऊंचे हैं। विशेषकर कच्चे तेल के दाम उच्चस्तर पर बने हुए हैं और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं और निकट भविष्य में जब कभी पेट्रोलियम मूल्य बढ़ाए जाएंगे, मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ने का जोखिम बना रहेगा। रिजर्व बैंकी की इस राय से लगता है कि मंगलवार को घोषित होने वाली सालाना ऋण एवं मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक नकदी उधार देने (रेपो) और अल्पकालिक उधार लेने (रिवर्स रेपो) की दरों में और वृद्धि कर सकता है। रेपो दर इस समय 6.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो 5.75 प्रतिशत पर है। पिछले एक साल में रिजर्व बैंक इनमें आठ बार वृद्धि कर चुका है।