यह ख़बर 29 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज में बैंकों को कोई छूट नहीं'

खास बातें

  • आरबीआई ने कहा है कि प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज का दूसरे क्षेत्रों में दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से बैंकों को इस श्रेणी के कर्ज मामले में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
Mumbai:

रिजर्व बैंक ने कहा है कि कृषि और लघु उद्योगों को दिए जाने वाले प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज का दूसरे क्षेत्रों में दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से बैंकों को इस श्रेणी के कर्ज मामले में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि इस तरह के कई मामले उसके संज्ञान में लाए गए हैं जिनमें दूसरे क्षेत्र के कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र की श्रेणी में दिखा दिया गया। बैंकों को इस मामले में अब कोई छूट नहीं मिलेगी। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा कोई भी कर्ज जिसे गलती से प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज में दिखा दिया गया और इस तरह की सूचना को बैंकों के सालाना वित्तीय जांच में प्रधान जांच अधिकारी ने पहचान लिया और उसकी जानकारी दे दी तो ऐसे कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज लक्ष्य में कमी के तौर पर माना जाएगा। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि इस तरह की पहचान की गई राशि को बैंक के प्राथमिक क्षेत्र के लक्ष्य में होने वाली कमी में जोड़ दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बैंकों को कुल कर्ज में 40 प्रतिशत कर्ज प्राथमिक क्षेत्र में आने वाले कर्जदारों को देना पड़ता है। इसमें कृषि क्षेत्र और लघु एवं मझौली इकाइयों को दिया जाना वाला कर्ज प्रमुख रूप से शामिल होता है।


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