खास बातें
- रिजर्व बैंक ने मंगलवार को पेश होने वाली ऋण एवं मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि के संकेत दे दिए हैं।
मुंबई: रिजर्व बैंक ने सतत् आर्थिक वृद्धि के लिए मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने को जरूरी बताकर मंगलवार को पेश होने वाली ऋण एवं मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि के संकेत दे दिए हैं। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक समीक्षा से एक दिन पहले वृहत आर्थिक परिवेश की समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि ऊंची मूल्य वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में मुद्रास्फीति पर नियंत्रण मौद्रिक नीति का एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति में वृद्धि का जोखिम पहले से बढ़ गया है इससे आर्थिक वृद्धि के उद्देश्य पर खतरा बढ़ सकता है इसके साथ ही समावेशी विकास में भी यह आड़े आ सकती है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 8.9 प्रतिशत रही है लेकिन इसके साथ ही खाद्यान्नों के ऊंचे दाम की वजह से दिसंबर में सकल मुद्रास्फीति भी 8.43 प्रतिशत के उच्चस्तर पर रही। खाद्य मुद्रास्फीति पिछले कुछ सप्ताह से लगातार दो अंकों में बनी हुई है। प्याज, टमाटर और सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंचने से गत 25 दिसंबर 2010 को समाप्त सप्ताह में यह 18.32 प्रतिशत की ऊंचाई तक पहुंच गई थी, हालांकि 15 जनवरी को समाप्त सप्ताह में यह कुछ नरम पड़कर 15.52 प्रतिशत रह गई। मुद्रास्फीति पर अंकुश रखने के लिए केन्द्रीय बैंक ने पिछले पूरे साल के दौरान छह बार रेपो और रिवर्स रेपो दरों में वृद्धि की। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति 25 जनवरी को जारी होनी है। एक बार फिर यह उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में वृद्धि करेगा।