यह ख़बर 19 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

चार माह में हादसों से रेलवे को 22 करोड़ का नुकसान

खास बातें

  • 2011 में अप्रैल-जुलाई में हादसों के कारण रेलवे की 22 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान का अनुमान है। इनमें वे हादसे शामिल नहीं हैं, जो मानव रहित क्रॉसिंग पर हुए।
New Delhi:

सरकार ने शुक्रवार को बताया कि 2011 में अप्रैल से जुलाई तक रेल दुर्घटनाओं के कारण रेलवे की करीब 22 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान होने का अनुमान है। इनमें वे हादसे शामिल नहीं हैं, जो मानव रहित क्रॉसिंग पर हुए। रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने एनके सिंह के पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2008-09 में ऐसे हादसों में रेलवे को करीब 60.65 करोड़ रुपये, 2009-10 में लगभग 53.71 करोड़ रुपये और 2010-11 में करीब 71.93 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। त्रिवेदी ने अविनाश राय खन्ना के पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि हादसे के प्रभावितों को जानमाल की हानि होने पर मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रेल यात्रियों के लिए बीमा सुविधा वर्ष 2008 में बंद किए जाने के बाद, वर्तमान में रेल यात्रियों और संपत्ति के लिए किसी तरह के बीमे की सुविधा नहीं है। रेलमंत्री ने बताया कि पूर्व में एक आंतरिक व्यवस्था के तहत साधारण बीमाकर्ताओं से बीमा कराया जाता था, जिसमें रेलवे हादसे के पीड़ितों को मुआवजा देती थी। यह सुविधा 2008 में बंद कर दी गई। रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि 2010 में बीमा दावा के मुद्दे पर विचार के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई, जिसने सुझाया कि इसके लिए एक रेलवे कार्पस कोष बनाना होगा। बहरहाल इस कोष की व्यवहार्यता का पता लगाया जा रहा है। त्रिवेदी के अनुसार, बीमा सुविधा बंद करने के कई कारण थे। बीमा कंपनियां दावे के भुगतान में देर कर देती थीं, ब्याज नहीं देना चाहती थीं। इसके अलावा प्रीमियम भी एक मुद्दा था।


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