खास बातें
- वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बैंकों से कहा कि वे अपनी गैर निष्पादित आस्तियों को कम करें ताकि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय हालत मजबूत हो।
नई दिल्ली: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बैंकों से कहा कि वे अपनी गैर निष्पादित आस्तियों को कम करें ताकि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय हालत मजबूत हो।
सार्वजनिक क्षेत्र के बंकों का एनपीए जनवरी-मार्च 2010-12 तिमाही में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गया जो पिछली तिमाही में 3.18 प्रतिशत था।
वे यहां सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों व वित्तीय संस्थानों के आला अफसरों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि बैंकों ने एनपीए घटाने की चुनौती को स्वीकार किया है। इस गति को बनाए रखना होगा और इस दिशा में सही समय पर उठाए गए कदमों से बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर वित्तीय हालत सुनिश्चित होगी।'
वित्तमंत्री ने इस बात पर भी खुशी जताई कि एनपीए की समस्याओं को टालने के लिए बैंक अपनी तरफ से कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कपड़ा क्षेत्र तथा बिजली क्षेत्र में वितरण कंपनियों के ऋणों के पुनर्गठन के हाल ही के फैसले एनपीए प्रबंधन के अच्छे उदाहरण हैं। उन्होंने कहा, 'मैं आपसे आग्रह करता हूं कि भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के अनुसार एनपीए पर नियंत्रण तथा इसे घटाने के लिए विभिन्न कदमों का इस्तेमाल करें।