यह ख़बर 08 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

अर्थव्यवस्था के लिए आगे कठिन समय : प्रणब

खास बातें

  • वित्तमंत्री ने आने वाले महीनों को मुश्किल बताते हुए कहा कि रुपये पर दबाव बना रहेगा और चालू वित्तवर्ष में वृद्धि दर 7.5 फीसदी से कम रह सकती है।
मुंबई:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आने वाले महीनों को मुश्किल बताते हुए कहा कि रुपये पर दबाव बना रहेगा और चालू वित्तवर्ष में वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से कम रह सकती है। एनडीटीवी बिजनेस लीडरशिप पुरस्कार समारोह में प्रणब ने कहा कि रुपये पर दबाव के पीछे मुख्य तौर पर वैश्विक परिस्थितियां ही जिम्मेदार हैं और जब तक यूरोप के सरकारी ऋण संकट का कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं होता है, रुपये पर यह दबाव बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि चालू वित्तवर्ष की चौथी तिमाही मुश्किल हो सकती है और वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से नीचे गिर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्तवर्ष के दौरान 4.6 के अनुमानित राजकोषीय घाटे को हासिल करना मुख्य चुनौती होगी। मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में हमारे सामने आगे तीन महीने मुश्किल होंगे। 2011-12 के लिए हमारी आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत या फिर इससे कम हो सकती है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को समय के अनुरुप नीतियां बनाने के लिए तैयार रहना होगा। सुधार प्रणाली, नियामक ढांचे में सुधार और आने वाले संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए संस्थानों को तैयार रखना होगा। मुखर्जी ने कहा रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बीच संतुलन जैसे मुख्य चिंताओं पर गौर करना होगा। रिजर्व बैंक 24 जनवरी को चालू वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति की समक्षा पेश करेगा।