खास बातें
- प्रणब ने आयकर अधिकारियों के सम्मेलन में अपने मन की बात रखते हुए उनसे वसूली बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की।
New Delhi: प्रत्यक्ष कर वसूली में 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित करने के बाद वित्त मंत्रालय को जल्दी ही यह चिंता होने लगी है कि महंगाई और अंतरराष्ट्रीय वित्त बाजार की डांवाडोल स्थिति के चलते यह लक्ष्य दूभर न हो जाए। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को आयकर अधिकारियों के सम्मेलन में अपने मन की बात रखते हुए उनसे वसूली बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की और नियमों को कड़ाई से लागू करने को कहा। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मुख्यआयकर आयुक्तों और आयकर महानिदेशकों के 27वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति ज्यादा अनुकूल नहीं है और इसमें अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं के साथ साथ ईंधन के दाम काफी उंचे बने हुए हैं, जिससे मुद्रास्फीति को बढ़ावा मिल रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों की इस स्थिति से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि और नकदी की स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा ऐसे में आयकर विभाग को अपने कर वसूली लक्ष्यों को हासिल करने के लिये कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। अधिकारियों को कर नियमों और कर प्रशासन का कड़ाई से पालन करना होगा। वर्ष 2011-12 के बजट में 5.33 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर वसूली का लक्ष्य रखा गया है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री ने कहा कि 13वें वित्त आयोग ने वर्ष 2014-15 तक प्रत्यक्ष कर वसूली 8.30 लाख करोड़ रुपये और प्रत्यक्ष कर, जीडीपी अनुपात 7.62 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इस लिहाज से तीन वर्ष में प्रत्यक्ष कर, जीडीपी दर को दो प्रतिशत ऊंचा करना होगा। इस समय यह अनुपात 5.66 प्रतिशत है। रिजर्व बैंक ने भी तीन मई को जारी 2011-12 की सालाना मौद्रिक एवं रिण नीति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और उपभोक्ता वस्तुओं की ऊंची कीमतों पर चिंता जाहिर की थी। बैंक ने वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में मुद्रास्फीति के नौ प्रतिशत के आसपास रहने की भविष्यवाणी की है हालांकि कहा है कि मार्च 2012 तक यह घटकर 6 प्रतिशत रह जाएगी। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 8.66 रही है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इससे पहले 2011-12 का बजट पेश करते हुये भारतीय अर्थव्यवस्था के 9 प्रतिशत वृद्धि के साथ बढ़ने की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा मुद्रास्फीति की औसत दर भी कम रहेगी और चालू खाते का घाटा भी कम होगा। दूसरी तरफ रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाकर आठ प्रतिशत कर दिया। पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 8.6 प्रतिशत रही है। प्रणब मुखर्जी ने कर वसूली, रिफंड और कर प्रशासन में सुधार सहित विभिन्न मोर्चों पर आयकर विभाग द्वारा हासिल लक्ष्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्ष 2010-11 में 85 लाख मामलों में 74,000 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए जबकि इस साल अप्रैल महीने में ही 20 लाख मामलों में 23,000 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया जा चुका है। वित्तमंत्री ने कर अधिकारियों को आयकर अधिनियम 1961 से आगे बढ़कर अब प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के नए कायदे कानूनों के अनुरुप तैयारी करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह काम करदाताओं को बिना किसी असुविधा के होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न फाइलिंग और इलेक्ट्रोनिक तरीकों से कर भुगतान उत्साहवर्धक रहा है लेकिन इस दिशा में अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। विभाग को सेवा की गुणवता में और सुधार लाने की जरूरत है।