यह ख़बर 24 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'भारत, चीन के उभरने से जी-24 की बदली भूमिका'

खास बातें

  • प्रणब ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत, चीन जैसे देशों के महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरने से जी-24 देशों की भूमिका में बदलाव आया है।
वाशिंगटन:

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत, चीन और अर्जेंटीना जैसे विकासशील देशों के महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरने से जी-24 देशों की भूमिका में व्यापक बदलाव आया है। भारत ने करीब तीन दशक के बाद विकासशील देशों के इस समूह का नेतृत्व संभाला है। प्रणब मुखर्जी ने भारतीय मीडिया के साथ बातचीत में कहा, जी-24 देशों की भूमिका में 70 और 80 के दशक के बाद से बड़ा बदलाव आया है। जी-24 समूह के कई सदस्य जैसे चीन, भारत और अर्जेंटीना काफी महत्वपूर्ण हैं और उनकी अर्थव्यवस्था भी काफी मजबूत है। इस लिहाज से जी-24 का जो चरित्र 70 और 80 के दशक में था वह अब नहीं रह गया है। जी-24 यानी 24 विकासशील देशों का समूह वर्ष 1971 में गठित हुआ था। इस समूह का मकसद वैश्विक मौद्रिक और विकासात्मक वित्तीय गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर विकासशील देशों की स्थिति को समन्वित करना था। भारत ने दक्षिण अफ्रीका से जी-24 का नेतृत्व संभाला है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी गुरुवार को समूह के नए अध्यक्ष बन गए। उन्होंने इससे पहले 1980 में भी इस समूह का नेतृत्व किया था। जी-24 समूह का नेतृत्व संभालने के बाद मुखर्जी ने कहा, मैं वर्ष 1983-84 में भी जी-24 का अध्यक्ष निर्वाचित हुआ हूं और अब फिर से 2011-12 में। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता है। उन्होंने कहा, हम और ज्यादा धन नहीं मांग रहे हैं। हम उन समस्याओं को सुलझा रहे हैं जो हमें प्रभावित कर रही हैं। समूह का नेतृत्व संभालने के बाद मुखर्जी ने कहा, मेरा मानना है कि विकासशील देशों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने में जी-24 की महत्वपूर्ण भूमिका है। समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के मामले में भी बेहतर भूमिका निभा सकता है। यहां तक कि दुनिया के विकास एजेंडा में भी समूह की बेहतर भूमिका होगी।


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