यह ख़बर 07 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

वाहन क्षेत्र में मंदी का दौर अस्थायी : प्रफुल्ल

खास बातें

  • सरकार ने कहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से वाहन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जो चिंता की बात है।
नई दिल्ली:

सरकार ने कहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से वाहन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जो चिंता की बात है। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा जताया है कि घरेलू वाहन बाजार में बिक्री में गिरावट अस्थायी है। भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने आज यहां वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के सालाना सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से चिंता की स्थिति बनी है। इससे निश्चित रूप से वाहन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। पर हमें उम्मीद है कि यह अस्थायी रुख है और अर्थव्यवस्था के अन्य संकेतकों में सुधार के साथ इसमें भी सुधार होगा। इस साल मई में वाहन उद्योग की वृद्धि दर सात प्रतिशत रही थी। जून में स्थिति और खराब हुई और कारों की बिक्री की वृद्धि दर घटकर मात्र 1.62 प्रतिशत यानी 27 माह के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं जुलाई में तो घरेलू कार बाजार में कारों की बिक्री में 15.76 प्रतिशत की गिरावट आई। 30 माह तक लगातार वृद्धि के बाद पहली बार किसी महीने में साल दर साल आधार पर कारों की बिक्री में गिरावट आई है। कारों में बिक्री की मुख्य वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ हाल के महीनों में ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि भी है। मार्च, 2010 के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई पर अंकुश के लिए नीतिगत दरों में 11 बार बढ़ोतरी कर चुका है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा 16 सितंबर को आनी है। कुल मुद्रास्फीति जुलाई में 9.44 प्रतिशत पर थी। पटेल ने कहा कि महंगाई पर अंकुश लगाने तथा अन्य वित्तीय उपाय करने की जरूरत है। इस समय पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हुई है, इसका भी देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। पिछले साल जून में पेट्रोल कीमतों को नियंत्रणमुक्त किए जाने के बाद से इसकी कीमतों में 21 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। उस समय दिल्ली में पेट्रोल का दाम 51.43 रुपये प्रति लीटर था, जो आज बढ़कर 63.70 रुपये प्रति लीटर हो चुका है। सरकार ने इस साल जून में डीजल की कीमतों में तीन रुपये की वृद्धि कर इसे 41.21 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।


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