यह ख़बर 25 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

डीजल को नियंत्रण मुक्त करने में राजनीतिक बाध्यता बड़ी रुकावट

खास बातें

  • डीजल मूल्य नियंत्रणमुक्त किए जाने को आवश्यक बताते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने कहा कि व्यवहारिक और राजनीतिक बाध्यतायें सरकार को ऐसा करने से रोकती हैं।
नई दिल्ली:

डीजल मूल्य नियंत्रणमुक्त किए जाने को आवश्यक बताते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने बुधवार को कहा कि व्यवहारिक और राजनीतिक बाध्यतायें सरकार को ऐसा करने से रोकती हैं।

रिजर्व बैंक ने कल जारी मौद्रिक समीक्षा में सरकार को डीजल के दाम नियंत्रण मुक्त करने का सुझाव दिया है। रिजर्व बैंक के इस सुझाव पर रेड्डी ने कहा ‘उनका सुझाव अकादमिक दृष्टि से ठीक है, लेकिन हमें व्यवहारिक और राजनीतिक मुश्किलों पर भी देखनी चाहिए।’ तेल कंपनियां इस समय डीजल की बिक्री पर 14.57 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर मुद्रास्फीति पर पड़ेगा क्योंकि इसका ज्यादा इस्तेमाल परिवहन क्षेत्र में होता है।

सरकार ने जून 2010 में पेट्रोल के दाम नियंत्रणमुक्त कर दिये थे। इसके बावजूद कंपनियां पेट्रोल के दाम बाजार लागत के अनुरुप नहीं बढ़ा पा रही हैं। विशेषकर उन पर चुनावों के समय दाम नहीं बढ़ाने का अप्रत्यक्ष दबाव रहता है। तेल कंपनियों को इस समय पेट्रोल पर 1.50 रुपये का नुकसान हो रहा है। रिजर्व बैंक ने मंगलवर को जारी रिण एवं मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में कहा है कि सकल मांग और व्यापार घाटे पर नियंत्रण के लिये डीजल के दाम नियंत्रणमुक्त करना समझदारी वाला कदम होगा।

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रेड्डी ने कहा ‘नियंत्रण हटाना सैद्धांताकि तौर पर सही है, लेकिन हमें देश में महंगाई की स्थिति पर भी विचार करना होगा।’