खास बातें
- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति का लगातार लंबे समय तक ऊंचा बने रहना अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय है।
New Delhi: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति का लगातार लंबे समय तक ऊंचा बने रहना अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ बनाने के लिए देश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया है। सिंह ने प्रशासनिक सेवा दिवस के उपलक्ष्य में एक समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा , हमें अपनी खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे...हमारी अर्थव्यवस्था पिछले सात सालों में अच्छी हालत में रही है। हमने आकर्षक वृद्धि दर हासिल की है। हम इसे हाल में उत्पन्न सबसे गंभीर वैश्विक वित्तीय संकट के दिनों में भी बरकरार रखने में सफल रहे। उन्होंने कहा, तथापि, पिछले डेढ़ सालों से सतत मुद्रास्फीति विशेषकर खाद्य क्षेत्र की मुद्रास्फीति चिंता का विषय बनी है। सिंह ने कहा कि सरकार की नीति विकास को बगैर प्रभावित किए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की रही है। उन्होंने जोर दिया कहा, हमने इसे हासिल करने के लिए नाजुक और मुश्किल संतुलन कायम करने के प्रयास किए हैं। 2009 में सूखे की स्थिति के बाद से खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति तेजी की राह पर रही है, क्योंकि सूखे के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ। मुद्रास्फीति के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा कि हालांकि हाल के दिनों में स्थिति सुधरी है। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति घटकर एकल अंक में आ गई है, पर इसका दीर्घावधिक समाधान कृषि क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने में ही है। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति ने 9 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में इससे पिछले तीन सप्ताहों की गिरावट के रुख को बदलते हुए बढ़कर 8.74 प्रतिशत हो गई। इससे पिछले सप्ताह यह 8.28 प्रतिशत थी। मासिक आधार पर मार्च के महीने में सकल खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 8.98 प्रतिशत थी, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 8 प्रतिशत के लक्ष्य से कहीं अधिक है।