खास बातें
- मनमोहन ने कहा, किसे लाइसेंस मिला..पहले आओ, पहले पाओ नीति का कैसे क्रियान्वयन किया गया, इस बारे में मेरे साथ चर्चा नहीं हुई।
New Delhi: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा की 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए पहले आओ, पहले पाओ की विवादास्पद नीति के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों बारे में जानकारी नहीं थी। इसके कारण सरकार को 1. 76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मनमोहन ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों के साथ बातचीत में कहा, किसे लाइसेंस मिला..पहले आओ, पहले पाओ नीति का कैसे क्रियान्वयन किया गया, इस बारे में मेरे साथ कभी चर्चा नहीं हुई और न ही इसे मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया। यह पूरी तरह दूरसंचार मंत्री का फैसला था। बहरहाल, उन्होंने कहा, चूंकि वित्त और दूरसंचार मंत्री 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन की मौजूदा नीति को जारी रखने पर सहमत थे, ऐसे में मुझे नहीं लगा कि मैं नीलामी पर जोर देने की स्थिति में हूं। उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने स्पेक्ट्रम आवंटन की गलत नीति के कारण सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान जताया है। इस मुद्दे पर राजा को पिछले साल नवंबर में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया। संप्रग के दूसरे शासनकाल में ए राजा को मंत्री बनाए रखने के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि गठबंधन सरकार में सहयोगी दलों के नेताओं की रुचि को स्वीकार करना पड़ता है और द्रमुक ने राजा और दयानिधि मारन को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, किसी भी समय, ऐसा लगने का कोई कारण नहीं था कि कुछ गलत किया गया है। मनमोहन ने कहा कि उन्होंने नवंबर 2007 में राजा को पत्र लिखकर उनसे स्पेक्ट्रम की नीलामी को ध्यान में रखकर कुछ मुद्दों की तकनीकी और कानूनी पहलुओं की संभावना पर विचार करने को कहा था। उन्होंने कहा, राजा ने ठीक उसी दिन मुझे पत्र लिखा और कहा कि मैं जो भी कुछ कर रहा हूं वह पूरी तरह पारदर्शी है। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और न करूंगा जो मेरे वादे के खिलाफ हो। प्रधानमंत्री ने कहा, जहां तक नीलामी का सवाल है, वह (राजा) मेरे पास आए और कहा कि नीलामी के बारे में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और दूरसंचार आयोग ने कोई सुझाव नहीं दिया है। उन्होंने कहा, राजा ने यह भी कहा कि अगर हमने इसकी नीलामी की तो नई कंपनियों को समान अवसर नहीं मिल पाएगा क्योंकि मौजूदा कंपनियां निश्चित मेगाहर्ट्ज तक पहले ही नि:शुल्क स्पेक्ट्रम हासिल कर चुकी हैं।