खास बातें
- पीएम ने एस-बैंड स्पेक्ट्रम मामले में हुए करोड़ों के कथित नुकसान सम्बंधी आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया।
नई दिल्ली/बेंगलुरू: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में हुए करोड़ों रुपये के कथित नुकसान सम्बंधी आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स और एक निजी कम्पनी के बीच हुए करार से राजकोष को कम से कम दो लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री ने एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन किया है जो एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपेगा।" दो सदस्यीय आयोग में योजना आयोग के सदस्य व पूर्व कैबिनेट सचिव बी. के. चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य रोडेम नरसिम्हा हैं। उधर, इसरो ने बेंगलुरु में एक बयान जारी कर कहा, "जांच आयोग को अपनी सिफारिश प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपने का निर्देश दिया गया है।" ज्ञात हो कि अंतरिक्ष मंत्रालय सीधे प्रधानमंत्री के अधीन है। बयान में कहा गया है, "आयोग एंट्रिक्स कॉपोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए करार की तकनीकी, व्यावसायिक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करेगा और साथ ही वह इस करार को मंजूरी देने के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं की भी जांच करेगा। आयोग मंजूरी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और उसमें बदलावों के सम्बंध में सलाह भी देगा।" उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में एंट्रिक्स कॉपोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 20 वर्ष का करार हुआ था। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस करार से राजकोष को दो लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गत मंगलवार को एस-बैंड के आवंटन से राजस्व को किसी तरह के नुकसान की बात से इनकार किया था।