खास बातें
- केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सामान्य कर परिवर्जन नियम (गार) का मसौदा दिशानिर्देश जारी कर विभिन्न पक्षों से इस पर राय आमंत्रित की।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सामान्य कर परिवर्जन नियम (गार) का मसौदा दिशानिर्देश जारी कर विभिन्न पक्षों से इस पर राय आमंत्रित की। इसके साथ ही सरकार ने कहा कि विभिन्न पक्षों की राय मिलने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस पर फैसला लेंगे।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मसौदा दिशानिर्देश जारी किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने मसौदा दिशानिर्देशों को नहीं देखा है, और विभिन्न पक्षों से राय मिलने के बाद वह इस पर निर्णय लेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुद को दिशानिर्देश से अलग करते हुए कहा, "वित्त मंत्रालय के अधिकारी स्तर पर सरकारी वेबसाइट पर डाले गए गार दिशा-निर्देश सिर्फ मसौदा दिशा-निर्देश हैं और इसे सिर्फ विभिन्न पक्षों की राय लेने के लिए ही जारी किया गया है।"
बयान में कहा गया, "गार दिशा-निर्देशों को प्रधानमंत्री ने नहीं देखा है, जिनके पास फिलहाल वित्त मंत्रालय का प्रभार है। इसे प्रतिक्रिया के आधार पर उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।"
मसौदा दिशानिर्देश को वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग के वेबसाइट पर जारी किया गया है। इस पर 20 जुलाई 2012 तक टिप्पणी तथा सलाह आमंत्रित किए गए हैं।
सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित नियम एक अप्रैल 2013 से लागू किए जाने हैं। इसका मकसद कराधान प्रणाली की खामियां दूर करना तथा कर चोरी करने वालों का पता लगाना है।
प्रणब मुखर्जी ने मार्च में पेश किए गए 2012-13 के आम बजट में गार का प्रस्ताव रखा था। हालांकि कारोबारियों तथा खास कर विदेशी निवेशकों की ओर से व्यापक विरोध के बाद इसका क्रियान्वयन एक साल के लिए टाल दिया गया था।
दिशानिर्देश के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों को नए नियमों से मुक्त कर दिया जाएगा। विवादास्पद नियम पार्टिसिपेटरी नोट पर लागू नहीं होगा, जिसके जरिए अधिकतर विदेशी निवेशक भारत में निवेश करते हैं।
मसौदा दिशानिर्देश आयकर महानिदेशक की अध्यक्षता वाली एक समिति ने तैयार किया है।