यह ख़बर 31 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

एसकेएस को सिफारिश बनी सुबोध के गले की फांस

खास बातें

  • एसकेएस इस्पात एंड पॉवर लिमिटेड कंपनी को दो कोयला ब्लाक अलॉट करने की सिफारिश सुबोधकांत सहाय के गले की फांस बन गया है।

एसकेएस इस्पात एंड पॉवर लिमिटेड कंपनी को दो कोयला ब्लाक अलॉट करने की सिफारिश सुबोधकांत सहाय के गले की फांस बन गया है।

एनडीटीवी के खुलासे पर सफाई दे रहे केंद्रीय मंत्री सहाय ने माना कि उनके भाई 7 फरवरी 2008 को कोयला मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में मौजूद थे जिसमें एसकेएस कंपनी को दो कोयला ब्लॉक देने पर विचार हुआ था लेकिन उनका दावा है कि इस कंपनी में उनके भाई की कोई हिस्सेदारी नहीं है।

सुबोध कांत सहाय ने कहा, 'मेरे भाई सुधीर सहाय न स्टेकहोल्डर हैं और न कंपनी के बोर्ड में डायरेक्टर हैं। उनके प्रोफेशनल संबंध हैं कंपनी से…वह एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर हैं कंपनी में।'  

दरअसल, एनडीटीवी ने खुलासा किया था कि 7 फरवरी 2008 को केंद्रीय मंत्री सहाय के भाई सुधीर सहाय स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में एसकेएस के डायरेक्टर की हैसियत से शामिल हुए थे जहां दो कोल ब्लॉक्स देने पर विचार हुआ जबकि सहाय इसके दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर सिफारिश कर चुके थे।

यह मामला सीधे तौर पर 'कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' का है। एक केन्द्रीय मंत्री ने कोल ब्लॉक की सिफारिश उस कंपनी के लिए की जिसका रिश्ता सीधे तौर पर उसके भाई से था। हालांकि सहाय को इसमें कुछ गलत नहीं लगता। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी अगर कोई प्रस्ताव निजी कंपनी की तरफ से आता है जिससे झारखंड का फायदा होगा तो वह उसे आगे बढ़ाएंगे।

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सुबोध कांत सहाय ने कोयला आवंटन मामले में अपने ऊपर लगे हर आरोप पर सफाई पेश करने की कोशिश की लेकिन यह समझाने में नाकाम रहे कि क्यों केन्द्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने ऐसी कंपनी को कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश पीएम से की जिनके साथ उनके अपने ही भाई के कामकाजी संबंध थे।