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खास बातें
- रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले वित्तमंत्री के साथ अपने मतभेदों को उजागर कर दिया। उन्होंने वित्तमंत्री चिदंबरम के उस वक्तव्य पर टिप्पणी की, जिसमें चिदंबरम ने कहा था कि आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए वह (सरकार) अकेले ही ब
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले शुक्रवार को वित्तमंत्री के साथ अपने मतभेदों को उजागर कर दिया।
उन्होंने वित्तमंत्री पी चिदंबरम के उस वक्तव्य पर टिप्पणी की, जिसमें चिदंबरम ने कहा था कि आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए वह (सरकार) अकेले ही बढ़ना पसंद करेंगे। चिदंबरम ने यह टिप्पणी रिजर्व बैंक की लगातार सख्त मौद्रिक नीति को देखते हुए की थी।
रिजर्व बैंक गवर्नर का पद छोड़ने से एक सप्ताह पहले सुब्बाराव ने सरकार और रिजर्व बैंक के बीच मतभेदों को लेकर मीडिया में कई खबरें आने का जिक्र किया। रिजर्व बैंक की स्वायत्तता और जवाबदेही को लेकर भी काफी खबरें प्रकाशित हुई हैं।
सुब्बाराव ने कहा, जर्मनी के पूर्व चांसलर गेरार्ड श्रोएडर ने एक बार कहा था, मैं अक्सर बंडसबैंक को लेकर परेशान हो जाता हूं, लेकिन भगवान का शुक्र है कि यह है। उन्होंने कहा, मुझे भी उम्मीद है कि वित्तमंत्री चिदंबरम भी एक दिन कहेंगे, "मैं अक्सर रिजर्व बैंक की वजह से हताश होता हूं, इतना परेशान होता हूं कि मैं बाहर निकल जाना चाहता हूं, चाहे मुझे अकेले ही चलना पड़े, लेकिन भगवान का शुक्र है कि रिजर्व बैंक है।"
सुब्बाराव ऐसा कहते हुए चिदंबरम के उस वक्तव्य का ही संदर्भ दे रहे थे, जब उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में कहा था, "यदि सरकार को आर्थिक वृद्धि की खातिर अकेले ही चलना होगा, तो वह अकेले ही आगे बढ़ेगी।" रिजर्व बैंक की मुद्रास्फीति की चिंता में सख्त मौद्रिक नीति को जारी रखने से चिदंबरम उस समय परेशान थे। सरकार की राजकोषीय मजबूती के लिए पंचवर्षीय कार्ययोजना पेश किए जाने के बावजूद रिजर्व बैंक ने उच्च ब्याज दर की नीति को जारी रखा था।