अरुण जेटली की फाइल तस्वीर
नई दिल्ली:
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जोर देकर कहा है कि उनकी सरकार ऊंची दर से कर लगाने वाली सरकार नहीं है। कर की दरें नीचे रखकर वह निवेश के लिए बचत बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि को पटरी पर लाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाना चाहते हैं।
वित्त मंत्री ने लोकसभा में शुक्रवार को वित्त विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए ऋणपत्रों में निवेश वाले म्यूचुअल फंड यूनिटों पर पूंजीगत लाभ कर के मामले में मामूली राहत की घोषणा की।
इसके साथ ही देरी से कर रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाले जुर्माने के मामले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को अपने विवेक से निर्णय लेने का अधिकार दिया है। जेटली ने पिछली तिथि से कर कानून में ऐसा कोई संशोधन नहीं करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिससे कि पिछली तिथि से नई कर देनदारी पैदा हो।
उन्होंने कहा कि कर चोरी रोकने के लिए तैयार किए गए विवादास्पद सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) पर बाद में फैसला करेंगे। वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने 2014-15 का वित्त विधेयक पारित कर दिया। इसके साथ ही लोकसभा में बजट पारित होने की प्रक्रिया पूरी हो गई।
उन्होंने कहा, हम ऊंची दर से कर लगाने वाली सरकार नहीं हैं। ऊंची कर वाली सरकार देश में उद्योग एवं व्यवसाय को प्रोत्साहित नहीं कर सकती। ऐसी सरकार रोजगार सृजन भी नहीं कर सकती। ऊंचे कर से कम लागत की विनिर्माण स्थिति नहीं बना सकती... आखिर उपभोक्ता क्या खरीदना चाहता है... वह उत्पाद खरीदना चाहता है, वह करों को नहीं खरीदना चाहता।
जेटली ने कहा, हम ऐसी परिस्थिति का निर्माण करना चाहते हैं, जहां भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में धारणा सुधरे। हाल के दिनों में निवेशकों की नजरों में इसमें गड़बड़ हुई है।