खास बातें
- केयर्न इंडिया की भागीदार ओएनजीसी ने सरकार से कहा है कि सौदे को मंजूरी देने से पहले राजस्थान तेल क्षेत्र की रॉयल्टी का मुद्दा सलझाया जाना चाहिए।
New Delhi: केयर्न इंडिया-वेदांता सौदे में लगातार एक के बाद एक अड़चन खडी होती जा रही है। केयर्न इंडिया की भागीदार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने सरकार से कहा है कि सौदे को मंजूरी देने से पहले राजस्थान तेल क्षेत्र की रॉयल्टी का मुद्दा सलझाया जाना चाहिए। ओएनजीसी का कहना है कि राजस्थान तेल फील्ड से उत्पादित कच्चे तेल पर रॉयल्टी का भुगतान उसने किया है, जो कि उसकी हिस्सेदारी से ज्यादा रही है। ओएनजीसी की केयर्न इंडिया के राजस्थान तेल फील्ड में 30 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन उसने फील्ड से उत्पादित पूरे कच्चे तेल के लिए रॉयल्टी का भुगतान किया। इससे कंपनी को नुकसान हुआ है। मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कंपनी बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में कहा गया कि उसने न केवल अपनी हिस्सेदारी, बल्कि केयर्न इंडिया की 70 फीसदी हिस्सेदारी के एवज में भी रॉयल्टी दी है। इस राशि को कंपनी के मंगला तथा अन्य तेल क्षेत्रों से होने वाले कच्चे तेल की बिक्री से प्राप्त रकम से निकाला जाना चाहिए। ओएनजीसी बोर्ड के प्रस्ताव को पेट्रोलियम मंत्रालय की उन पूर्वशर्तों में शामिल किया जाएगा, जिसे केयर्न वेदांता सौदे की मंजूरी देने के लिए रखा गया है। सूत्रों ने कहा कि ओएनजीसी बोर्ड के प्रस्ताव पर कानून मंत्रालय ने सहमति व्यक्त की है और अब इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जा रहा है। प्रवासी भारतीय उद्यमी अनिल अग्रवाल की लंदन में सूचीबद्ध वेदांत रिसोर्सेज ने केयर्न एनर्जी की भारतीय इकाई केयर्न इंडिया की बहुलांश हिस्सेदारी 9.6 अरब डॉलर में खरीदने का सौदा किया है। बहरहाल, भारत में विभिन्न मंजूरियों के मिलने की प्रतीक्षा में यह सौदा लटका हुआ है।