खास बातें
- एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का 66 प्रतिशत नियंत्रण कई बोर्डों में शामिल निदेशकों के एक छोटे समूह के पास है।
अहमदाबाद: नेशनल स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का 66 प्रतिशत नियंत्रण कई बोर्डों में शामिल निदेशकों के एक छोटे समूह के पास है। ये निदेशक ऐसे हैं जो पांच या अधिक कंपनियों के निदेशक मंडल में शामिल हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) द्वारा किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। यह अध्ययन रिपोर्ट कॉपिंग विद कारपोरेट कालेस्ट्राल बोर्ड इंटरलाक्स एंड देयर इम्पैक्ट आन कारपोरेट गवर्नेंस-द इंडियन एक्सपिरियंस आईआईएम, अहमदाबाद के निदेशक डॉ समीर बरुआ ने एक विजिटंग प्रोफेसर तथा आईआईएम बेंगलूर के दो सहायक प्राफेसरों के साथ मिलकर तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे हाल में पेश किए कारपोरेट गवर्नेंस नियमों की क्षमता पर सवाल खड़ा होता है, जिनका मकसद निदेशकों की विभिन्नता को बढ़ाना है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस तरह सिर्फ कुछ लोगों के हाथों में आर्थिक शक्तियां केंद्रित होना समाज के वृहद हित में नहीं है। आईआईएम-बेंगलूर के सहायक प्रोफेसर सुरेश भगावातालु ने कहा, निदेशकों के एक छोटे से समूह के पास 2010 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का 66 प्रतिशत बाजार पूंजीकरण है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2001 से 2003 तक तीन वर्षों में ऐसी कंपनियां जिनके निदेशक कई बोर्डों में शामिल हैं, का बाजार पूंजीकरण 33 से 43 प्रतिशत के बीच था। यह 2007 में बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया और 2010 में 66 प्रतिशत पर था। सरकार ने सूचीबद्ध कंपनियों को अपने निदेशक मंडल में ज्यादा स्वतंत्र निदेशक रखने का निर्देश दिया है। पर शोधकर्ताओं ने पाया है कि इससे एक ही निदेशक कई-कई कंपनियों में बन गया है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि कई मामलों में अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशकों के पदों को दूसरी कंपनियों के निदेशकों से भरा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे निदेशक जो कई कंपनियों के बोर्ड में हैं उनकी संख्या 2001 में 40 थी और 2010 में यह बढ़कर 71 हो गई। एनएसई-100 की कंपनियों में कुल निदेशकों की संख्या 1,104 है, जबकि 284 कंपनियां ऐसी हैं जिनके निदेशक कई-कई कंपनियों में हैं। ऐसे निदेशक जो कई कंपनियों में हैं, उनकी एनएसई-100 की कंपनियों में संख्या छह प्रतिशत की है।