खास बातें
- सिन्हा ने कहा कि हालांकि वसूली न किए जा सकने वाले ऋण की मात्रा बढ़ रही है लेकिन इसे अभी प्रणालीगत जोखिम के तौर पर नहीं देख रहा है।
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आनंद सिन्हा ने बुधवार को कहा कि हालांकि वसूली न किए जा सकने वाले ऋण की मात्रा यानि एनपीए बढ़ रही है लेकिन केंद्रीय बैंक इसे अभी प्रणालीगत जोखिम के तौर पर नहीं देख रहा है। फिक्की-आईबीए की बैठक के मौके पर उन्होंने कहा हमें नहीं लगता कि बढ़ते एनपीए से कोई प्रणालीगत जोखिम है। लेकिन आगे कुछ क्षेत्र में जोखिम हो सकता है। केंद्रीय बैंक ने पिछले 15 महीनों में अपने मुख्य ऋण दर में सवा चार (425 आधार अंक) फीसद की जोरदार बढ़ोतरी की है ताकि मुद्रास्फीति पर लगाम लगाई जा सके जिसके बाद बैंकों ने भी ब्याज दरें बढ़ाईं। उन्होंने कहा मैं यह नहीं कहूंगा कि हम विशेष तौर पर खुदरा ऋण खंड के बारे में पेरशान हैं लेकिन हां, खुदरा खंड पर दबाव जरूर होगा। बैंक को सबसे अधिक जोखिम छोटे और मंझोल उद्योगों और गैर प्रतिभूत (अनसीक्योर्ड) श्रेणी से है जिनमें मुख्य तौर पर व्यक्तिगत ऋण (पर्सनल लोन), क्रेडिट कार्ड कारोबार और आवास ऋण शामिल हैं। बैंकरों ने पिछले महीने आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव से कहा कि ब्याज दरें बढ़ती भी हैं तो भी बैंकों को कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है। मंगलवार को देश के सबसे बड़े ऋणदाता एसबीआई के मुख्य वित्त अधिकारी दिवाकर गुप्ता ने कहा कि उनके बैंक के 7,000 करोड़ रुपए के शिक्षा ऋण पर दबाव है। कोलकाता स्थित यूनाईटेड बैंक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भास्कर सेन ने भी कहा कि खतरे बढ़ रहे हैं विशेष तौर पर छोटे और मंझोले उपक्रम और खुदरा क्षेत्र में और वह बजाय ईएमआई बढ़ाने के रिण का स्वरूप बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।