नोटबंदी : मोबाइल वॉलेट, प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा लेकिन छोटे कारोबारियों को नहीं हुआ फायदा

नोटबंदी : मोबाइल वॉलेट, प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा लेकिन छोटे कारोबारियों को नहीं हुआ फायदा

नोटबंदी : मोबाइल वॉलेट, प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा लेकिन छोटे कारोबारियों को नहीं हुआ फायदा

मुंबई:

नोटबंदी के बाद से देश में प्लास्टिक मनी और मोबाइल वॉलेट का चलन खूब बढ़ा है, कई छोटी-छोटी दुकानों में भी इसके बोर्ड टंगे मिल जाएंगे लेकिन कई दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने मोबाइल वॉलेट का बोर्ड तो लगा लिया लेकिन इससे कारोबार में कोई खास फर्क नहीं पड़ा.

पुरानी किताबों की दुकान से लेकर वड़ा-पाव की दुकान तक मुंबई के परेल इलाके में आपको मोबाइल वॉलेट का बोर्ड मिल जाएगा. सैलून चलाने वाले सागर ने भी यही सोचकर महीने भर पहले पेटीएम (Paytm) की  सेवा ली थी लेकिन कहते हैं कोई खास फायदा नहीं हुआ. उन्होंने कहा- लोग बाल कटवाकर दाढ़ी बनवाकर चले जाते हैं, कई बार पैसा आता नहीं है. नाहर शेख दो साल से परेल स्टेशन के बाहर जूस की दुकान लगाते हैं. नोटबंदी में धंधा कम हुआ तो मोबाइल वॉलेट लिया लेकिन अब कह रहे हैं कि इसकी सेवा बंद करने वाले हैं. बोले- मुझे कोई फायदा नहीं हुआ, धंधा अभी भी वैसे ही चल रहा है अब मैं इसको हटाने वाला हूं.

 
paytm
हालांकि वडा पाव स्टॉल चलाने वाले संजय गुप्ता और होटल मालिक संदीप पलवनकर को थोड़ा बहुत फायदा हुआ है, लेकिन उतना नहीं जितना सोचा था. संजय ने कहा दिन में तीन-चार लोग इससे पेमेंट करते हैं. वहीं संदीप पलवनकर ने कहा- हमारी बिक्री 60 फीसद तक घटी है, लेकिन दिन में 500-1000 रुपये का पेमेंट पेटीएम से हो जाता है.

एसोचैम (ASSOCHAM) और आरएनसीओएस (RNCOS) की संयुक्त रिपोर्ट की मानें तो भारत में मोबाइल वॉलेट का कारोबार 160 फीसद की दर से बढ़ सकता है. 2013 में मोबाइल वॉलेट का कारोबार 1000 करोड़ रुपए के आसपास था जो फिलहाल बढ़कर 20,000 करोड़ के आसपास पहुंच गया. इसके बढ़ने की रफ्तार जारी है. इसके लिये जरूरी होगा छोटे छोटे कारोबारियों को हो रही मुश्किलों को हल ढूंढना.

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