खास बातें
- रुपये में गिरावट की वजह से तेल आयात महंगा होने के बावजूद पेट्रोल के दाम फरवरी अंत से पहले नहीं बढ़ेंगे।
नई दिल्ली: रुपये में गिरावट की वजह से तेल आयात महंगा होने के बावजूद पेट्रोल के दाम फरवरी अंत से पहले नहीं बढ़ेंगे। सरकार का उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले पेट्रोल के दाम बढ़ाने का इरादा नहीं है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि विधानसभा चुनाव से पहले पेट्रोल महंगा होगा।’ सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने पिछले एक माह के दौरान पेट्रोल कीमतों में वृद्धि को दो बार टाला है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल कीमतों को आयात मूल्य के बराबर लाने के लिए पेट्रोल के दामों में दो रुपये वृद्धि की जरूरत है।
ईरान और पश्चिम के देशों के बीच तनाव बढ़ने की वजह से तेल के दाम चढ़ गए हैं। तेल कंपनियों पर कीमतो में बढ़ोतरी का दबाव है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है। खासकर उत्तर प्रदेश में। उत्तर प्रदेश में अंतिम चरण का मतदान 28 फरवरी को होना है। ऐसे में सरकार मतदाताओं का मूड खराब करने के पक्ष में नहीं है।
तेल कंपनियां महीने की पहली और 16 तारीख को कीमतों में संशोधन करती हैं। वे औसत आयात मूल्य और पिछले पखवाड़े की विनिमय दरों के आधार पर कीमतों में संशोधन करती हैं। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में रुपया कमजोर होकर 53.07 प्रति डालर पर आ गया। इस वजह से पेट्रोल के दामों में दो रुपये वृद्धि की जरूरत है। दिसंबर के पहले पखवाड़े में रुपया 51.98 प्रति डालर के स्तर पर था।