खास बातें
- सीबीआई के निदेशक एपी सिंह अपने कार्यकाल में 2-जी घोटाला को सबसे बड़ा घोटाला मानते हैं। हालांकि तीन साल की जांच के बाद भी जांच एजेंसी यह पता नहीं लगा पाई है कि 2-जी घोटाले का आकार कितना है।
नई दिल्ली: सीबीआई के निदेशक एपी सिंह अपने कार्यकाल में 2-जी घोटाला को सबसे बड़ा घोटाला मानते हैं। हालांकि तीन साल की जांच के बाद भी जांच एजेंसी यह पता नहीं लगा पाई है कि 2-जी घोटाले का आकार कितना है।
30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे अमर प्रताप सिंह के दो साल के कार्यकाल के दौरान 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल, टाट्रा बीईएमएल घोटाला, आदर्श सोसाइटी घोटाला, कोयला खान आवंटन घोटाला जैसे मामले सुखिर्यों में रहे।
यह पूछे जाने पर कि उनके कार्यकाल में कौन सा घोटाला सबसे बड़ा रहा, उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से 2-जी।’’ जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इसका कारण 2-जी घोटाले से जुड़ा आंकड़ा है, उन्होंने कहा, ‘‘आंकड़ों के कारण नहीं बल्कि इससे संबद्ध जटिलताएं तथा उच्चतम न्यायालय की निगरानी इसकी वजह है।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या सीबीआई ने यह पता लगाया है कि आखिर कितने का घोटाला हुआ, सीबीआई के निदेशक ने कहा, ‘‘नहीं, हमने कोई नुकसान का आंकड़ा नहीं दिया है।’’ आरोपपत्र में दिए गए आंकड़ों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जांच में यह आंकड़ा 30,000 करोड़ रुपये पाया गया। यह मुद्रास्फीति समायोजित 2001 के मूल्य के मुकाबले 3.5 गुना अधिक है।
सिंह ने कहा, ‘‘लेकिन हमने इसे नुकसान नहीं माना। यह आंकड़ा अवधारणात्मक है।’’
दो साल पहले कार्यभार संभालने के समय एपी सिंह ने कहा कि एजेंसी किसी के भी कार्रवाई करने से नहीं झिझकेगी, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो। उन्होंने कहा, ‘‘2-जी, आदर्श मामला तथा सीडब्ल्यूजी जैसे हाई प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई लंबित होने की पृष्ठभूमि में यह टिप्पणी की गई थी। दो साल में हमने कमोबेश इन प्रतिबद्धताओं पर कायम रहने की कोशिश की है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘हमने यथासंभव एजेंसी के कामकाज में पारदर्शिता और खुलापन लाने का प्रयास किया है। सभी शिकायतों पर ध्यान दिया गया और उस पर विचार किया गया। कोई भी व्यक्ति निदेशक समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों तक मिलना चाहता है, मिल सकता है और अपनी बातें कह सकता है।’’