नई दिल्ली: बिहार की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) पर टैक्स की कैंची चलाए जाने की सरकार की योजना पर केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार ने इस कदम से देश के युवाओं का भविष्य खतरे में डाल दिया है।
वित्त वर्ष 2016-17 के बजट में एक अप्रैल के बाद होने वाले योगदान पर कर्मचारी भविष्य निधि से निकासी के 60 प्रतिशत हिस्से पर कर लगाने का प्रस्ताव किया गया। हालांकि सरकार ने पिछले दिनों संकेत दिया कि इसमें आंशिक रूप से कमी की जा सकती है।
इस पूरे मामले पर काफी हो हल्ला मचा हुआ है। EPF टैक्स के खिलाफ एक लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर भी किए हैं। (यहां क्लिक करके पढ़ें खबर)
इस टैक्स को खत्म करवाने के लिए सोशल मीडिया पर #RollBackEPF हैशटैग भी कई दिन चला जिसमें सरकार से लोगों ने अपील की कि इसे वापस ले लिया जाए। (यहां क्लिक करके पढ़ें खबर)
आम बजट 2016 में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से निकासी पर टैक्स लगाने के विवादास्पद प्रस्ताव पर सरकार ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण पिछले दिनों जारी किया था। शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस कदम से तुरंत पीछे हटने की कोई संभावना नहीं है। वित्तमंत्री ने मंगलवार को ही NDTV से बात करते हुए कहा था कि इस कदम के पीछे एक पेंशनभोगी समाज बनाने का विचार है, खासतौर से निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए, जिनके पास पेंशन की कोई सुविधा फिलहाल नहीं है।