यह ख़बर 01 सितंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

मोबाइल टावरों से विकिरण उत्सर्जन में होगी भारी कमी

खास बातें

  • इससे मोबाइल टावरों से निकलने वाली विकिरणों से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर संबंधी चिंताएं दूर होने का अनुमान है। अब किसी भी टावर (दो एंटिना वाले) की आवासीय भवन से दूरी कम से कम 35 मीटर रखनी होगी।
नई दिल्ली:

मोबाइल टेलीफोन टावरों से विकिरण उत्सर्जन शनिवार से मौजूदा स्तर से घटकर 10वां हिस्सा रह जाएगा। इससे मोबाइल टावरों से निकलने वाली विकिरणों से आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर संबंधी चिंताएं दूर होने का अनुमान है।

इसके तहत किसी भी टावर (दो एंटिना वाले) की आवासीय भवन से दूरी कम से कम 35 मीटर रखनी होगी। देश भर में सात लाख से अधिक टावर हैं। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार घरेलू कारखानों में बने या आयातित होने वाले हैंडसेट की भी इस मामले क्षमता घटानी होगी।

दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि इन मानकों का अनुपालन नहीं करने पर प्रति टावर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। उन्होंने कहा कि आम लोगों का स्वास्थ्य पहले आता है। प्रौद्योगिकी अंगीकार करनी होगी, लेकिन जन-स्वास्थ्य पहले आता है। इसी तरह, मोबाइल हैंडसेट की समावेशी दर (एसएआर) भी अब 1.6 वाट प्रति किलो होगी, जो प्रति ग्राम मानव उत्तक पर आंकी जाती है।

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मंत्री ने कहा कि कंपनियों को भंडार के मौजूदा हैंडसेटों को इसके अनुपालन लायक बनाने के लिए एक साल का समय दिया गया है। नए हैंडसेट नियमों का पालन करने वाले ही होने चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल उपयोक्ताओं को मोबाइल को शरीर से दूर रखने के लिए ब्लूटूथ तथा तार वाले स्पीकर आदि का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सिब्बल ने कहा है कि नए एसएआर मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए टेलीग्राफ एक्ट में संशोधन किया जाएगा।