खास बातें
- रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी के लिए विवेकपूर्ण नियम सख्त कर दिए ताकि संभावित आर्थिक मंदी के किसी भी तरह के प्रभाव से उनकी रक्षा की जा सके।
मुंबई: रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए विवेकपूर्ण नियम सख्त कर दिए ताकि संभावित आर्थिक मंदी के किसी भी तरह के प्रभाव से उनकी रक्षा की जा सके। इस घटनाक्रम से इनकी उधारी की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। रिजर्व बैंक के नए नियमों के तहत जमा एवं गैर-जमा लेने वाले एनबीएफसी को अपने निष्पादित ऋणों का 0.25 प्रतिशत किसी भी वित्तीय अनिवार्यता को पूरा करने के लिए अलग रखना होगा। रिजर्व बैंक के इस कदम से एनबीएफसी के ऋणों की ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है क्योंकि उन्हें कोष के तौर पर अतिरिक्त धन रखने की जरूरत पड़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे ब्याज दरें चौथाई प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा, एनबीएफसी के लिए एक वित्तीय प्रतिरोधक सुनिश्चित करने के लिए मानक परिसंपत्तियों के लिए भी प्रावधान पेश करने का निर्णय किया गया है। इससे पहले गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को संदिग्ध एवं डूबती परिसंपत्तियों के लिए ही धन अलग से रखना होता है। ये ऐसे ऋण हैं जिन पर ऋण लेने वाले ग्राहकों द्वारा नियमित तौर पर ब्याज की अदायगी नहीं की जाती या फिर ग्राहक डिफॉल्ट होता है।