यह ख़बर 21 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

भारत की वृद्धि दर घटकर सात फीसदी से नीचे आ जाएगी : मूडीज

खास बातें

  • मूडीज ने कहा कि नीतिगत कमजोरियों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक वातावरण की अनिश्चितता के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 8.5 फीसद से घटकर सात फीसदी से भी नीचे आ सकती है।
नई दिल्ली:

वैश्विक साख निर्धारण एजेंसी मूडीज ने बुधवार को कहा कि नीतिगत कमजोरियों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक वातावरण की अनिश्चितता के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 8.5 फीसद से घटकर सात फीसदी से भी नीचे आ सकती है। एजेंसी ने एक बयान में कहा, पिछले कुछ महीनों में देख में ब्याज दर उंची रखने की नीति तथा धुंधली वैश्विक आर्थिक तस्वीर, दोनों ने मिलकर विनिर्माण उत्पाद और निवेश की गतिविधि को प्रभावित किया है। मूडीज ने एक रपट में कहा वैश्विक रिण की अनिश्चित स्थिति, उच्च घरेलू ब्याज दर और नीतिगत पहल की स्पष्ट कमी के कारण हमें आशंका है कि वृद्धि दर 2011-12 में सात फीसद से नीचे आ जाएगी जो 2010-11 में 8.5 फीसद थी .. नीतिगत पहल के कारण कारोबारी भरोसा कायम हो सकता है। एजेंसी ने कहा कि इस साल वृद्धि दर जहां छह से सात फीसद से बीच रही वहीं पिछले पांच साल में भारत की औसत वृद्धि दर 8.5 फीसद रही। यह फिर भी बीएए3 की साख वाले देशों के औसत से अधिक होगा। रपट के मुताबिक यह चक्रीय गिरावट 2012-13 के दौरान किसी समय मुद्रास्फीति मौजूदा नौ फीसद के स्तर से घट सकती है जिससे सख्त मौद्रिक नीति में धीरे धीरे बदलाव किया जा सकता है। एजेंसी ने कहा हमें उम्मीद है कि बचत और निवेश के मौजूदा स्तर के सहारे मध्यम अवधि में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार लीक पर आ जाएगी..। सरकार का अनुमान है कि देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2011-12 में 7.5 फीसद होने की उम्मीद है। इस बीच मूडीज ने सरकार के स्थानीय औश्र विदेशी मुद्रा बांड की रेटिंग बीएए3 की जिसेस निवेश की श्रेणी का संकेत मिलता है। मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने एक बयान में कहा कि भारत की साख के प्रति उसका दृष्टिकोण स्थिर है।


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