दोनों देशों के बीच संभावित सौदों की रूपरेखा पर चर्चा वाशिंगटन में प्रधानमंत्री की बठकों में हो सकती है। अमेरिका की पांच दिन की यात्रा पर आए मोदी यहां से कल वाशिंगटन पहुंचेंगे। उनका 30 सितंबर को वापसी का कार्य्रकम है।
इस मामले के जानकार सूत्रों ने कहा कि बोइंग, लाकहीड मार्टिन, जनरल इलेक्ट्रिक व रेथियोन जैसी दिग्गज कंपनियां भारत के रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के ठेके हासिल करने को प्रयासरत हैं। इनमें सैन्य हेलीकॉप्टरों का सौदा भी है।
इसी तरह गूगल, आईबीएम, एडोब व काग्नीजेंट जैसी सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ने संभवत: भारत सरकार की स्मार्ट शहर तथा डिजिटल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में भागीदारी की इच्छा प्रकट की है।
पेप्सीको कुछ अन्य उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियां स्वच्छ भारत तथा कुछ अन्य कार्य्रकमों में सहभागिता का प्रस्ताव कर सकती हैं।
प्रधानमंत्री ने भारतीय मूल के प्रतिष्ठित अमेरिकियों के एक समूह के साथ यहां बैठक की। इस समूह में कुछ व्यावसायिक क्षेत्र के भी हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत आकर देश के लोगों को व्यवसाय व उद्यमिता के गुर सिखाने का न्योता दिया।
मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जबकि भारत सरकार अर्थव्यवस्था में नयी जान डालने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने में लगी है।
भारत में निर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए मोदी ने अपनी यात्रा पर निकलने से पहले ही मेकइन इंडिया (भारत में बनाओ) कार्य्रकम शुरू किया था। इसमें उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल थीं।
मोदी का इस यात्रा में काफी व्यस्त कार्य्रकम है जिसमें वह अमेरिका के कई प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों से मिलने वाले हैं। प्रधानमंत्री कहते रहे हैं कि उनकी सरकार भारत में 'लालफीते के बजाय लाल गलीचे' से करेगी।
प्रधानमंत्री की यहां अमेरिकी कारपोरेट जगत की 15 से अधिक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होने वाली है जिसमें गूगल, बोइंग व जनरल इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां शामिल हैं।
प्रधानमंत्री 30 सितंबर को वाशिंगटन में भारत-अमेरिका व्यावसायिक परिषद द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भी भाग लेंगे। उसमें 300-400 उद्यमियों के शामिल होने की संभावना है।
मोदी की इस यात्रा से भारत अमेरिका व्यापार संबंधों को बल मिलने की उम्मीद की जा रही है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 2013 में 64 अरब डॉलर था।