यह ख़बर 25 मई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

मोदी इफेक्ट : एशिया-पैसिफिक में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बना रुपया

नई दिल्ली:

पूंजी के बढ़ते प्रवाह तथा नई सरकार को लेकर उम्मीदों से 2014 में अभी तक एशिया-पैसिफिक में रुपया सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा है। पिछले साल रिकॉर्ड निचले स्तर तक जाने वाला रुपया इस समय 11 माह के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के विश्लेषण के अनुसार इस साल अभी तक रुपया 5.3 प्रतिशत मजबूत हुआ है और यह अन्य एशिया-पैसिफिक की मुद्राओं से आगे निकल गया है। यह इंडोनेशिया के रुपिया व न्यूजीलैंड के डॉलर से अधिक तेजी से मजबूत हुआ है। गत शुक्रवार को रुपया मजबूत होकर 58.52 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

2014 की शुरुआत में भारतीय मुद्रा 61.8 प्रति डॉलर पर थी। छह माह से कम समय में रुपया 327 पैसे मजबूत हुआ है। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से रुपये में तेजी आई है। पिछले साल अगस्त में रुपया 68.80 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर आ गया था।

कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रानिल पैन ने एक रिपोर्ट में कहा, चुनाव नतीजों के बाद सकारात्मक धारणा से हम एफआईआई के प्रवाह के अपने अनुमान को 5 अरब डॉलर बढ़ाकर 20 अरब डॉलर कर सके हैं। कुल भुगतान संतुलन (बीओपी) अधिशेष 29 अरब डॉलर रहेगा। वित्तवर्ष 2014-15 में रुपया 57 से 61 प्रति डॉलर के दायरे में रहेगा।

एशिया-पैसिफिक में भारतीय मुद्रा के बाद इंडोनेशिया के रुपिया में सबसे ज्यादा 4.6 प्रतिशत की मजबूती दर्ज हुई है। इस दौरान न्यूजीलैंड का डॉलर 3.75 प्रतिशत व ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा 3.5 प्रतिशत मजबूत हुई।


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