यह ख़बर 23 नवंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

मिडकैप, स्मॉलकैप का प्रदर्शन सेंसेक्स से बेहतर

मुंबई:

देश के शेयर बाजारों में गत सप्ताह बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों को प्रदर्शन सेंसेक्स और निफ्टी से बेहतर रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में जहां लगभग एक फीसदी की गिरावट रही, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप में आधी फीसदी से कुछ कम तेजी रही।

गत सप्ताह बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0.89 फीसदी या 182.03 अंकों की गिरावट के साथ शुक्रवार को 20,217.39 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 1.00 फीसदी या 60.7 अंकों की गिरावट के साथ 5,995.45 पर बंद हुआ।

गत सप्ताह सेंसेक्स के 30 में से 11 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। टाटा स्टील (4.45 फीसदी), जिंदल स्टील (3.89 फीसदी), ओएनजीसी (2.94 फीसदी), हिडाल्को इंडस्ट्रीज (2.69 फीसदी) और एलएंडटी (2.61 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे सेसा स्टरलाइट (8.74 फीसदी), बजाज ऑटो (6.85 फीसदी), सिप्ला (4.78 फीसदी), सन फार्मा (4.07 फीसदी) और टाटा मोटर्स (3.29 फीसदी)।

आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में आधी फीसदी से कम तेजी रही। मिडकैप 0.22 फीसदी या 13.23 अंकों की तेजी के साथ 6,154.28 पर और स्मॉलकैप 0.64 फीसदी या 37.94 अंकों की तेजी के साथ 5,994.11 पर बंद हुआ।

गत सप्ताह अमेरिका के फेडरल रिजर्व की आखिरी बैठक के ब्यौरे से यह संकेत मिला कि आगामी महीने से फेड अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दिए जा रहे वित्तीय राहत में कटौती शुरू करेगा। इस संकेत से सप्ताह के आखिरी हिस्से में विदेशी निवेशकों ने काफी बिकवाली की। फेडरल रिजर्व अभी प्रतिमाह 85 अरब डॉलर मूल्य के बांड खरीदता है। इसके कारण एशिया तथा अन्य उभरती अर्थव्यवस्था में तरलता बनी हुई है। फेड की 29-30 अक्टूबर की बैठक का ब्यौरा बुधवार 20 नवंबर को प्रकाशित हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार 21 नवंबर को कहा कि वह बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता पर ध्यान देगा और देश में कर्ज वसूली बेहतर करेगा। उल्लेखनीय है कि भारतीय बैंकों का बुरा ऋण 2009 की स्थिति के मुकाबले सितंबर के आखिर में लगभग दो गुना यानी, कुल ऋण के 4.2 फीसदी स्तर तक पहुंच चुका है। कर्ज का सरलीकरण भी उच्चतम स्तर तक पहुंच चुका है। रिजर्व बैंक ने कहा कि स्थिति पर प्राथमिकता के साथ ध्यान देना जरूरी है।

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अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने बुधवार 20 नवंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा रुपये के कमजोर होने के कारण भारत की शाखा प्रभावित नहीं होगी। फिच ने भारत को 'बीबीबी (नकारात्मक)' की रेटिंग दी है। यह सबसे निचली श्रेणी की निवेश रेटिंग है। इसने जून में देश के परिदृश्य को 'नकारात्मक' से संशोधित कर 'स्थिर' कर दिया है।