यह ख़बर 04 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

तीन सप्ताह की गिरावट के बाद शेयर बाजारों में उछाल

खास बातें

  • देश के शेयर बाजारों में लगातार तीन सप्ताह की गिरावट के बाद तेजी दर्ज की गई। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आलोच्य अवधि में 2.13 फीसदी या 358.74 अंकों की तेजी के साथ 17,197.93 पर बंद हुआ।
मुम्बई:

देश के शेयर बाजारों में लगातार तीन सप्ताह की गिरावट के बाद तेजी दर्ज की गई। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आलोच्य अवधि में 2.13 फीसदी या 358.74 अंकों की तेजी के साथ 17,197.93 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पिछले सप्ताह 319.25 अंकों की गिरावट के साथ 16,839.19 पर बंद हुआ था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी आलोच्य सप्ताह में 2.27 फीसदी या 115.85 अंकों की तेजी के साथ शुक्रवार को 5,215.70 पर बंद हुआ।

पिछले सप्ताह निफ्टी 105.25 अंकों की गिरावट के साथ 5,099.85 पर बंद हुआ था।

आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में लगभग तीन फीसदी तेजी रही। मिडकैप 3.14 फीसदी या 185.03 अंकों की तेजी के साथ 6072.53 पर बंद हुआ। जबकि स्मॉलकैप 2.96 फीसदी या 188.10 अंकों की तेजी के साथ 6,545.70 पर बंद हुआ।

गत सप्ताह सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे एनटीपीसी (8.66 फीसदी), भेल (7.88 फीसदी), सिप्ला (7.17 फीसदी), एलएंडटी (4.72 फीसदी) और सन फार्मा (4.71 फीसदी)।

सेंसेक्स में इस सप्ताह गिरावट में रहने वाले शेयरों में प्रमुख रहे भारती एयरटेल (3.44 फीसदी), कोल इंडिया (2.76 फीसदी), हीरो मोटोकॉर्प (2.39 फीसदी), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (0.64 फीसदी) और टाटा स्टील (0.59 फीसदी)।

गत सप्ताह बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में तेजी रही। बिजली (4.97 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (4.70 फीसदी), रियल्टी (4.38 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (4.28 फीसदी) और तेल एवं गैस (2.47 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समीक्षा जारी होने के एक दिन पहले सोमवार को देश की आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमान को घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया और महंगाई तथा वित्तीय घाटा बढ़ने की आशंका जाहिर कर दी।

आरबीआई ने आर्थिक और मौद्रिक विकास पर तिमाही रिपोर्ट में मौजूदा कारोबारी साल के लिए विकास के पूर्वानुमान को घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया। इससे पहले उसने अप्रैल में विकास दर के 7.2 फीसदी रहने की सम्भावना जाहिर की थी।

आरबीआई ने कहा, "देश का आर्थिक परिदृश्य कमजोर है। अनिश्चित वैश्विक आर्थिक स्थिति के बीच सुस्त विकास, ऊंची महंगाई दर, चालू खाता घाटा और वित्तीय घाटा तथा निवेश घटने से अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है।"

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा कारोबारी साल में देश की विकास दर छह फीसदी से 6.5 फीसदी के बीच रहने की सम्भावना है। उन्होंने साथ ही कहा कि विकास दर के आठ फीसदी के पास पहुंचने में कम से कम दो साल लग जाएंगे।

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में आखिरी बार मीडिया से मुखातिब होते हुए कौशिक बसु ने मंगलवार को कहा कि देश की विकास दर मौजूदा कारोबारी साल की पहली छमाही में छह फीसदी से कम रह सकती है, लेकिन इसके बाद इसमें वृद्धि होगी, जबकि महंगाई दर घट कर सात फीसदी तक आ जाएगी।

बसु ने कहा, "पहली दो तिमाहियों में विकास दर छह फीसदी से कम रहेगी। उम्मीद है कि इसके बाद इसमें वृद्धि होगी।" 31 मार्च को समाप्त तिमही में देश की आर्थिक विकास दर 5.3 फीसदी रही, जो नौ सालों में सबसे कम है।

मंगलवार को पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम को नया केंद्रीय वित्त मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी सुशील कुमार शिंदे को केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को 24 फीसदी से घटाकर 23 फीसदी करने की घोषणा की, जो 11 अगस्त से लागू होगा। जबकि आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

आरबीआई ने मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा, "मौजूदा स्थितियों में नीतिगत दरों में कटौती से मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ जाएगा।"

एसएलआर में एक प्रतिशतांक की अप्रत्याशित कटौती का मकसद बाजार को कर्ज का प्रवाह बढ़ाना है। आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों का ऋण देने योग्य संसाधन 62,217 करोड़ रुपये बढ़ा दिया है।

भारत में एसएलआर कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है।

मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में आरबीआई ने रेपो दर आठ फीसदी और रिवर्स रेपो दर सात फीसदी पर बरकरार रखा। बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) भी 4.75 फीसदी पर बरकरार रखा।

बुधवार को जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक देश का निर्यात जून में 5.45 फीसदी गिरावट के साथ 25.07 अरब डॉलर रहा। उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों में मांग घटने के कारण लगातार दूसरे माह निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।

आयात आलोच्य अवधि में 13.46 फीसदी गिरावट के साथ 35.37 अरब डॉलर रहा, जिसके कारण इस महीने 10.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2012 की अवधि में निर्यात 75.20 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए 76.50 अरब डॉलर निर्यात से 1.70 फीसदी कम है।

मौजूदा कारोबारी साल के पहले तीन महीने में कुल आयात 115.25 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में दर्ज 122.74 अरब डॉलर आयात से 6.10 फीसदी कम है।

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बुधवार को देश की वाहन निर्माता कम्पनियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक टीवीएस मोटर कम्पनी, फोर्ड इंडिया और जनरल मोटर्स इंडिया को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख कम्पनियों ने इस साल जुलाई महीने में पिछले साल जुलाई महीने से अधिक वाहनों की बिक्री की।