यह ख़बर 17 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

संकटग्रस्त एयर इंडिया और किंगफिशर की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट

खास बातें

  • पिछले महीने एयर इंडिया बाजार हिस्सेदारी के मामले में चौथे पायदान पर लुढ़क गई। हालांकि, उस समय एयरलाइन में किसी तरह की श्रम संबंधी समस्या नहीं थी, इसके बावजूद सभी एयरलाइंस में उसके द्वारा सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं।
नई दिल्ली:

पायलटों की हड़ताल की वजह से संकट झेल रही राष्ट्रीय एयरलाइन एयर इंडिया की बाजार हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है। पिछले महीने एयर इंडिया बाजार हिस्सेदारी के मामले में चौथे पायदान पर लुढ़क गई। हालांकि, उस समय एयरलाइन में किसी तरह की श्रम संबंधी समस्या नहीं थी, इसके बावजूद सभी एयरलाइंस में उसके द्वारा सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा जारी अप्रैल माह के हवाई यातायात के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नकदी संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की किंगफिशर एयरलाइंस की हालत भी काफी खराब हुई है और वह बाजार हिस्सेदारी के मामले में आखिरी स्थान पर पहुंच गई है।

आंकड़ों के अनुसार, जेट एयरवेज और उसकी सहायक जेटलाइट की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी 28.2 प्रतिशत रही है। उसके बाद 23.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ बजट एयरलाइन इंडिगो और 17.7 प्रतिशत के साथ स्पाइसजेट का नंबर आता है। 17.6 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ एयर इंडिया चौथे स्थान पर है। वहीं 7.3 फीसद के साथ गोएयर पांचवें स्थान पर है। इस दौरान किंगफिशर एयरलाइंस की बाजार हिस्सेदारी मात्र 5.4 फीसद दर्ज की गई।

माह के दौरान एयर इंडिया ने सबसे ज्यादा 5.2 प्रतिशत उड़ानें रद्द कीं। खास बात यह है कि अप्रैल में एयर इंडिया के सामने किसी तरह का श्रम संकट नहीं था।

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उड़ानें रद्द करने के मामले में किंगफिशर दूसरे स्थान पर रही। किंगफिशर ने 3.3 फीसद उड़ानें रद्द कीं। एयर इंडिया का यात्री लोड फैक्टर यानी प्रत्येक उड़ान में यात्रियों की संख्या भी सबसे खराब 70.5 प्रतिशत रही। वहीं इंडिगो इस मामले में 82 फीसद के साथ पहले स्थान पर थी। डीजीसीए को मिली शिकायतों के मामले में गो एयर सबसे आगे रही। उसके बाद इंडिगो के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं।