खास बातें
- इसके अतिरिक्त वित्तमंत्री ने आयकर की स्लैब्स में परिवर्तन के जरिये आठ लाख से अधिक आय वाले व्यक्तियों को भी कुछ अतिरिक्त राहत दी है...
नई दिल्ली: वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने वित्तवर्ष 2012-13 के आम बजट में व्यक्तिगत करदाताओं को मामूली राहत देते हुए करमुक्त आय की सीमा को 1,80,000 रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है। इसके अतिरिक्त वित्तमंत्री ने आयकर की स्लैब्स में परिवर्तन के जरिये भी आठ लाख से अधिक आय वाले व्यक्तियों को कुछ अतिरिक्त राहत दी है। इन बदलावों से आठ लाख रुपये तक की आय वाले 'आम' करदाता को कुल मिलाकर 2,060 रुपये सालाना की बचत हो पाएगी। उल्लेखनीय है कि देश के अधिकतर करदाता इसी श्रेणी के हैं...
आयकर की बदली दरों के जरिये आम करदाता को मिलने वाली राहत इस प्रकार है...
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दो लाख रुपये तक की आय पर कुल 2,060 रुपये की बचत...
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दो से आठ लाख रुपये तक की आय पर भी कुल 2,060 रुपये की बचत...
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आठ से 10 लाख रुपये तक की आय पर कुल 22,660 रुपये की बचत...
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10 लाख रुपये तक की आय पर भी कुल 22,660 रुपये की बचत...
अब पांच लाख से अधिक तथा 10 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर 20 प्रतिशत आयकर देय होगा, जबकि अब तक आठ लाख रुपये तक की आय पर ही 20 प्रतिशत आयकर लगता था, तथा आठ से 10 लाख रुपये तक की आय पर 30 प्रतिशत आयकर देना होता था। पांच लाख रुपये तक की आय पर पहले की ही तरह 10 प्रतिशत कर देय होगा, जबकि 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर भी पहले की ही तरह 30 प्रतिशत आयकर देना होगा। इस बजट में वित्तमंत्री ने कंपनी आयकर (कॉरपोरेट टैक्स) की दर में कोई बदलाव नहीं किया है।
इसके अतिरिक्त 60 से 80 साल की आयु वाले वरिष्ठ नागरिकरों की 2.50 लाख रुपये की आमदनी पर पहले की तरह कोई कर नहीं लगेगा। 80 साल से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों को पांच लाख रुपये तक की आय पर कोई कर देय नहीं होगा। इसके अतिरिक्त महिलाओं और पुरुष करदाताओं के लिए भी करमुक्त आय में कोई अंतर नहीं रहा है। इससे पहले पुरुषों के लिए 1.80 लाख तथा महिलाओं के लिए 1.90 लाख रुपये तक की आय करमुक्त होती थी।
वित्तमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष कर पर दिए गए इन प्रस्तावों से सरकार को 4,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। वित्तमंत्री के अनुसार करमुक्तता की सीमा बढ़ाना प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) को लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम है, और उसे जल्द से जल्द लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमें 9 मार्च, 2012 को संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट मिल गई है, और हम तेजी से रिपोर्ट की समीक्षा कर उसे जल्द लागू करने का प्रयास करेंगे।" डीटीसी विधेयक करीब 50 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा।
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंक बचत खातों की कटौती से छोटे करदाताओं को फायदा होगा, और इससे पांच लाख रुपये तक की आमदनी वाले करदाता लाभान्वित होंगे। साथ ही बचत खातों पर 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई कर नहीं देना होगा।