यह ख़बर 07 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अमेरिका ने कहा, शुल्कों में कमी करे भारत

खास बातें

  • लॉक ने कहा कि अमेरिका नागरिक उड्डयन विमान, एक्स-रे फिल्म, सेब और पिस्ते जैसे उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को आसान चाहता है।
नई दिल्ली:

अमेरिका भारत में अपनी बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए शुल्क दरों में कमी चाहता है। अमेरिका ने कहा है कि भारत विश्व बैंक की कारोबार के लिए बेहतर स्थान की सूची में काफी निचले स्तर पर है, क्योंकि यहां कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी की सीमा तय है और कई उत्पादों पर ऊंचा आयात शुल्क लगता है। भारत की यात्रा पर आए अमेरिका के वाणिज्य मंत्री गैरी लॉक ने कहा कि अमेरिका नागरिक उड्डयन विमान, एक्स-रे फिल्म, सेब और पिस्ते जैसे उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को आसान चाहता है। लॉक ने कहा कि भारत में इन उत्पादों पर शुल्क दरें 19 से 50 प्रतिशत हैं। लॉक ने यहां सीआईआई के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की गैर-शुल्क बाधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा, दूरसंचार उपकरणों के लिए अनिवार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा अधिकार के उचित संरक्षण के अभाव को भी व्यापार के रास्ते की अड़चन बताया। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री ने कहा, हालांकि भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने के लिए कई कदम उठाए हैं, पर अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है। लॉक 24 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ ये बाधाएं एफडीआई को रोकेंगी। अमेरिका चाहता है कि भारत बहु-ब्रांड रिटेल क्षेत्र को खोले तथा रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एफडीआई की 26 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाए। लॉक ने कहा कि इन्हीं सब बाधाओं की वजह से आसानी से कारोबार वाले गंतव्यों की 184 देशों की सूची में भारत 134वें स्थान पर है। भारत में अमेरिकी कंपनियों के लिए समान अवसरों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा, हम विदेशी कंपनियों के साथ वही व्यवहार चाहते हैं, जो निवेशकों को अमेरिका में मिलता है।


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