खास बातें
- आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव के बीच नियुक्तियों की रफ्तार घटने से भारतीय रोजगार बाजार में मंदी जैसा माहौल बन रहा है।
New Delhi: आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव के बीच दूरसंचार, बीमा और रीयल एस्टेट क्षेत्र में नियुक्तियों की रफ्तार घटने से भारतीय रोजगार के बाजार में मंदी जैसा माहौल बन रहा है। जॉब पोर्टल नौकरी डाट काम के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हितेश ओबेराय ने बताया कि भारतीय रोजगार बाजार में नरमी के संकेत दिखाई पड़ रहे हैं। कंपनियों द्वारा नियुक्ति में तेजी नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार, बीमा, निर्माण और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में निश्चित तौर पर नियुक्तियों में नरमी है। ओबेराय ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के अलावा, मुद्रास्फीति में लगातार तेजी के रुख से भी घरेलू श्रम बाजार विशेषकर ब्याज दरों को लेकर संवेदनशील क्षेत्र जैसे रीयल एस्टेट और वाहन क्षेत्र मायूस हैं। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी और इसके बाद ब्याज दरों में वृद्धि से रीयल एस्टेट और वाहन जैसे क्षेत्र में वृद्धि दर घटी है। इसका इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर असर पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सकल मुद्रास्फीति दिसंबर, 2010 से 9 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और अगस्त में यह 13 महीने के उच्च स्तर 9.78 प्रतिशत पर पहुंच गई। मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों में मार्च, 2010 से लेकर अब तक 12 बार वृद्धि कर चुका है, जिससे कर्ज महंगा हुआ है। ब्याज दरों में वृद्धि के मद्देनजर उद्योग जगत ने महंगे कर्ज को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इससे उनकी विस्तार योजना प्रभावित होगी। ओबेराय ने कहा कि साथ ही वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता खासकर यूरोप में ऋण संकट गहाराने से कई कंपनियां कारोबार की संभावना को लेकर सतर्क हैं। इससे भी नियुक्ति गतिविधियां धीमी हुई हैं।