खास बातें
- प्रवासी भारतीय दिवस में शामिल होने वाले कई प्रवासी भारतीयों ने शिकायत की है कि सुविधाओं के अभाव और लालफीताशाही के कारण देश में निवेश करना कठिन है।
जयपुर:
प्रवासी भारतीय दिवस में शामिल होने वाले कई प्रवासी भारतीयों ने शिकायत की है कि सुविधाओं के अभाव और लालफीताशाही के कारण देश में निवेश करना कठिन है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें देश में निवेश करने के लिए कई सुविधाएं देने का वादा करती है, लेकिन उनका अनुपालन नहीं होता। उन्होंने कहा कि अपने देश आने की इजाजत लेने की प्रक्रिया दुरूह है और इसे सरल किए जाने की जरूरत है।
एक अमेरिकी कारोबारी चंद्रम मुकिम ने कहा, "सरकार ने हमें ओवरसीज इंडियन कार्ड दिया है, लेकिन इसे हासिल करने की प्रक्रिया में बहुत समय और धन लगता है।" उन्होंने कहा कि उन्हें यह कार्ड लेने के लिए 400 डॉलर देने पड़े और चार महीनों का इंतजार करना पड़ा।
कनाडा के एक प्रतिनिधि कमल सिंह ने कहा, "मैं जब भी भारत आता हूं, वापसी के वक्त मुझे कठिनाई होती है। अधिकारी मुझसे पूछते हैं कि मैं यहां इतने समय तक क्यों रहा। अनेक सवाल पूछे जाते हैं। यह मेरी मातृभूमि है। और मुझे यहां कितने भी समय तक रुकने की अनुमति होनी चाहिए।"
ब्रिटेन के लॉर्ड दिलजीत सिंह ने कहा कि वीसा लेने में काफी समस्या होती है। उन्होंने कहा कि ओवरसीज इंडियन कार्ड और पीपुल ऑफ इंडिया ओरिजिन कार्ड लेने की प्रक्रिया दुरूह है। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायत है कि दूतावास और उच्चायोग के अधिकारियों का रवैया विनम्र नहीं होता है। इसमें सुधार होना चाहिए।
एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि परियोजना को मंजूरी की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "निवेश के लिए लालफीताशाही सबसे बड़ी समस्या है। अधिकतर मामलों में नौकरशाह अपना वर्चस्व साबित करने में लगे रहते हैं और निवेश परियोजना की मंजूरी के रास्ते में बाधा खड़ी करते रहते हैं।"
कुछ प्रवासी भारतीयों ने भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया और कहा कि परियोजनाओं की मंजूरी के लिए अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देना एक कानून जैसा हो गया है।
यहां बिड़ला सभागार में सात से नौ जनवरी के बीच हो रहे प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में हिस्सा लेने 65 देशों के 1,700 से अधिक प्रतिनिधिमंडल आए हुए हैं।