वित्तमंत्री पी चिदंबरम का फाइल फोटो
खास बातें
- रुपये की विनिमय दर में अभूतपूर्व गिरावट के बीच वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के प्रभावों से निपटने के लिए देश के अंतर्गत उठाए गए कदम भी रुपये के मूल्य ह्रास के लिए जिम्मेदार हैं।
नई दिल्ली: रुपये की विनिमय दर में अभूतपूर्व गिरावट के बीच वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के प्रभावों से निपटने के लिए देश के अंतर्गत उठाए गए कदम भी रुपये के मूल्य ह्रास के लिए जिम्मेदार हैं।
चिदंबरम ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि रुपया अपनी वास्तविक दर से नीचे चल गया है। पर उन्होंने विश्वास जताया कि रुपया अपने उचित स्तर को पुन: प्राप्त कर लेगा।
उन्होंने सदस्यों के पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा, ‘हम मानते हैं कि केवल बाहरी कारण ही नहीं बल्कि घरेलू कारण भी हैं। इनमें से एक कारण यह है कि हमने राजकोषीय घाटे को सीमा तोड़ने दिया और चालू खाते का घाटा भी बढ़ने दिया गया। ऐसा 2009 और 2011 के दौरान किए गए कुछ फैसलों के कारण हुआ।’
चिदंबरम के अनुसार, यह वह अवधि थी जब सरकार ने पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के लड़खड़ाने से उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों के असर से घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कुछ राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा की थी।
वित्तमंत्री ने कहा, ‘इससे अर्थव्यवस्था स्थिर हुई और वृद्धि दर में सुधार हुआ। हम वर्ष 2008 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लड़खड़ाने के बहुत गंभीर प्रतिकूल प्रभावों से बच गए। लेकिन इसका नतीजा हमारे सामने राजकोषीय घाटे और चालू वित्त घाटे के रूप में आया।’
उन्होंने कंवरदीप सिंह के पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि सरकार ने राजकोषीय घाटे पर अंकुश के लिए कदम उठाए हैं और देश राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की ओर बढ़ रहा है।
वित्तमंत्री ने कहा कि अगस्त 2012 से मई 2013 के बीच विनिमय दर स्थिर थी, लेकिन 22 मई के बाद से रुपया दबाव में है।