यह ख़बर 12 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

निवेशकों का विश्वास जगाने को ठोस कदम उठाए सरकार

खास बातें

  • उद्योग मंडल एसोचैम ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की नकारात्मक टिप्पणियों तथा निवेशकों के भरोसे में कमी से उत्पन्न वातावरण में बदलाव के लिए सरकार से मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ फैसले करने का आह्वान किया है।
नई दिल्ली:

उद्योग मंडल एसोचैम ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की नकारात्मक टिप्पणियों तथा निवेशकों के भरोसे में कमी से उत्पन्न वातावरण में बदलाव के लिए सरकार से मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ फैसले करने का आह्वान किया है।

उद्योगमंडल एसोचैम के एक एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात कर घरेलू अर्थव्यवस्था के बारे में अपनी राय रखी।

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद एसोचैम के अध्यक्ष और सांसद राजकुमार धूत ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री के समक्ष आर्थिक वृद्धि, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स की रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर चर्चा की। धूत ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी 6.0 प्रतिशत से अधिक की दर से वृद्धि कर रही है और मजबूत है।

एसोचैम की ओर से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया जिसमें उच्च राजकोषीय घाटे तथा मुद्रास्फीति समेत मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने के उपायों की सिफारिश है।

धूत ने स्टैंडर्ड एंड पूअर्स के आकलन को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं हैं जिससे चिंतित हुआ जाए, यह रिपोर्ट ऐसी लगती हैं जैसे कि किसी शोधकर्ता ने समाचारपत्रों की कतरनों को एकत्रित कर उसे प्रकाशित कर दिया हो।

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केंडिट रेटिंग एजेंसी ने कहा था है कि केंद्र की गठबंधन सरकार सुधारवादी निर्णय इस लिए नहीं कर पा रही है क्योंकि इसका नेतृत्व एक ‘गैर निर्वाचित’ प्रधानमंत्री के हाथ में हैं जबकि राजनीतिक ताकत संप्रग अध्यक्षता सोनिया गांधी के पास है पर वह मंत्रिमंडल में नहीं हैं।